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EPFO और LIC में लावारिस पड़े 16,500 करोड़ रुपए का क्या करेगी सरकार? संसद में दिया बयान

अगर आप भी यह सोच रहे थे कि एलआईसी और ईपीएफओ में पड़ा लावारिस पैसा अब सरकार अपनी दूसरी योजनाओं में खर्च करने जा रही है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। सरकार ने संसद में इस पर स्थिति साफ कर दी है।

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लावारिस पैसों का क्या होगा?

भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में जमा पड़े लावारिस पैसों (Unclaimed Money) के भविष्य को लेकर पिछले काफी समय से देश में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स और आम लोगों के बीच यह आशंका जताई जा रही थी कि अगर लंबे समय तक इन पैसों का कोई दावेदार सामने नहीं आता है, तो केंद्र सरकार इस विशाल धनराशि को अपनी अन्य सरकारी या कल्याणकारी योजनाओं में स्थानांतरित (Transfer) करके इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि, अब सरकार ने इन सभी अटकलों और भ्रम की स्थिति पर विराम लगा दिया है। संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि अनक्लेम्ड फंड का किसी अन्य सरकारी योजना में इस्तेमाल करने का कोई विचार या प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

संसद में क्या मिला जवाब

लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने इस विषय पर सरकार का रुख पूरी तरह से साफ किया। उन्होंने बताया कि इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के नियमों के अनुसार बीमा क्षेत्र का काम चलता है। इन नियमों के तहत, अगर किसी बीमा पॉलिसी की राशि पर 10 वर्षों तक कोई दावेदार सामने नहीं आता या उस पर कोई क्लेम नहीं किया जाता है, तो उस राशि को नियमानुसार सीनियर सिटिजन वेलफेयर फंड (Senior Citizen Welfare Fund) में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इस तय प्रक्रिया और वैधानिक व्यवस्था के अलावा सरकार के पास पॉलिसीधारकों के इस पैसे को किसी अन्य सरकारी प्रोजेक्ट या योजना में डायवर्ट करने या उपयोग में लाने का कोई नया प्रस्ताव नहीं है।

कहां कितना पड़ा है लावारिस पैसा?

इसके साथ ही, सरकार की ओर से EPFO के खातों में पड़े पैसों को लेकर भी महत्वपूर्ण आंकड़े और जानकारी साझा की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि कानूनी तौर पर EPFO में 'अनक्लेम्ड अकाउंट' जैसा कोई शब्द या कैटेगरी नहीं होती है, बल्कि इन्हें 'इनऑपरेटिव' यानी निष्क्रिय खाते माना जाता है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इनऑपरेटिव EPF खातों में फिलहाल करीब 9,330.56 करोड़ रुपये की भारी रकम जमा है। इसके अलावा, एलआईसी (LIC) के आंकड़ों पर नजर डालें तो 31 मार्च 2026 तक कंपनी के पास कुल 7,318.50 करोड़ रुपये की अनक्लेम्ड राशि दर्ज की गई थी। इस कुल रकम में से 5,564.55 करोड़ रुपये मूल रूप से पॉलिसीधारकों के हैं, जबकि 1,753.95 करोड़ रुपये की बाकी बची राशि उस जमा धन पर समय के साथ मिला ब्याज है।

संसद में यह भी बताया गया कि सरकार, एलआईसी और ईपीएफओ दोनों ही संस्थान इस लावारिस राशि को उनके वास्तविक मालिकों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों (Nominees) तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। एलआईसी ने अपने आधिकारिक पोर्टल पर एक विशेष सुविधा शुरू की है, जहां लोग आसानी से अपना विवरण दर्ज करके अनक्लेम्ड राशि की खोज कर सकते हैं। दूसरी तरफ, ईपीएफओ ने भी एक सराहनीय पहल करते हुए आधार से जुड़े निष्क्रिय खातों के लिए एक पायलट योजना शुरू की है। इस योजना के तहत, जिन इनऑपरेटिव खातों में ₹1,000 या उससे कम की राशि बची हुई है, उन्हें बिना किसी झंझट के सीधे अंशधारक के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है कि लोगों का गाढ़ी कमाई का पैसा सुरक्षित रहे और सही प्रक्रिया के तहत वास्तविक हकदारों तक बिना किसी देरी के पहुंच जाए।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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