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'एक चुनाव के लिए लेते थे 100 करोड़...' प्रशांत किशोर ने बताई अपनी फीस

Prashant Kishor Fees: प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह किसी पार्टी को एक चुनाव में सलाह देने के 100 करोड़ या इससे ज्यादा फीस लेते थे। उन्होंने कहा, हम दो साल तक अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाते रहेंगे, उसके बदले केवल एक चुनाव में जाकर किसी को सलाह देंगे तो एक दिन में सारा पैसा आ जाएगा।

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प्रशांत किशोर

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Prashant Kishor Fees: बिहार की चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इस उपचुनाव में इंडिया गठबंधन और एनडीए के प्रत्याशियों के बीच टक्कर है। हालांकि, जन सुराज भी चुनावी मैदान में है। ऐसे में इस बात की चर्चा खूब हो रही है कि प्रशांत किशोर चुनाव में इतना खर्च कैसे कर रहे हैं? अब खुद उन्होंने इसका खुलासा किया है। पूर्व में चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह किसी पार्टी को एक चुनाव में सलाह देने के 100 करोड़ या इससे ज्यादा फीस लेते थे।

प्रशांत किशोर ने कहा, दस राज्यों में उनकी बनाई सरकार चल रही है, तो क्या हमको अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाने का पैसा नहीं मिलेगा? इतना कमजोर समझ रहे हो आप? उन्होंने आगे कहा, हम दो साल तक अपने अभियान के लिए टेंट और तंबू लगाते रहेंगे, उसके बदले केवल एक चुनाव में जाकर किसी को सलाह देंगे तो एक दिन में सारा पैसा आ जाएगा। बता दें, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बेलागंज, इमामगंज, रामगढ और तरारी में अपने उम्मीदवार उतारे हैं।

अगले 8 साल सिर्फ बिहार पर फोकस

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा, उनका फोकस सिर्फ बिहार है और अगले 8 साल तक वह सिर्फ बिहार की बिगड़ी हुई व्यवस्था को सुधारने के काम करेंगे। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कहा कि नीतीश कुमार आज कल यह कहते हैं कि लालू प्रसाद के राज में गया शाम छह बजे बंद हो जाता था, हमारी सरकार आने के बाद व्यवस्था में बदलाव आया है। हम नीतीश कुमार से पूछना चाहते हैं कि गया, हैदराबाद, बैंगलोर जैसा कब बनेगा।

लालू यादव को दिया बड़ा ऑफर

बिहार में जाति की राजनीति पर प्रशांत किशोर ने कहा, जाति की राजनीति नहीं हो रही है। सिर्फ परिवारवाद की राजनीति होती है। उन्होंने कहा कि लालू यादव की इच्छा है कि उनका बेटा बिहार का राजा बन जाए। भाजपा नीतीश के सहारे में बिहार में अपनी नैया पार लगाने में लगी है। कुछ ऐसा ही हाल नीतीश का भी है। वहीं, जीतन राम मांझी चाहते हैं कि उनके परिवार के लोग मंत्री, सांसद और विधायक बने रहें। अगर लालू यादव अपने समाज के किसी काबिल व्यक्ति को सीएम का चेहरा बनाने की बात करते हैं, तो हम कैमरे के सामने कह रहे हैं कि जन सुराज लालू यादव और उनकी पार्टी को समर्थन देगी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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