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हेमंत सोरेन ने झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले की भविष्यवाणी, BJP के लिए किया ये बड़ा दावा

Jharkhand Politics: हेमंत सोरेन ने इस साल होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव को लेकर भविष्यवाणी की है। उन्होंने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव के बाद झारखंड से BJP का सफाया हो जाएगा। जेल से बाहर आते ही झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के मुखिया ने सियासी रणनीतियों पर काम तेज कर दिया है।

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हेमंत सोरेन का बड़ा दावा।

Photo : PTI

Hemant Soren on BJP: जेल से बाहर आते ही झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फुल ऑन एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर वो रणनीतियों पर काम कर रहे हैं, साथ ही चुनावी नतीजों के बाद की भविष्यवाणी भी कर रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के मुखिया सोरेन ने भारतीय जनता पार्टी के लिए ये दावा किया है कि सूबे से उसका सफाया होना निश्चित है।

'झारखंड से भाजपा का हो जाएगा सफाया'

हेमंत सोरेन ने शनिवार को भाजपा पर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ी भविष्यवाणी की। उन्होंने दावा किया कि चुनावी नतीजों के बाद भाजपा का राज्य से सफाया हो जाएगा। अपने आवास पर झामुमो कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि उन्हें जेल में बंद करने की साजिश रचने वालों के खिलाफ विद्रोह होगा और झारखंड के लोग भाजपा को नहीं बख्शेंगे। झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा, 'भाजपा के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का समय आ गया है। आने वाले दिनों में झारखंड से भाजपा का सफाया हो जाएगा।'

शुक्रवार को जेल से रिहा हुए हैं हेमंत सोरेन

धन शोधन के एक मामले में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद सोरेन को शुक्रवार को बिरसा मुंडा जेल से रिहा किया गया। झामुमो नेता को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 8.36 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के सिलसिले में 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। हेमंत सोरेन ने आरोप लगाया कि भाजपा ने सभी संवैधानिक प्रतिष्ठानों पर नियंत्रण कर लिया है, लेकिन लोगों ने हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में उसे सबक सिखाया है।

‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ का किया जिक्र

भाजपा पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, 'मेरी जानकारी में आया है कि वे विधानसभा चुनाव समय से पहले कराने की योजना बना रहे हैं... मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे जिस दिन चाहें चुनाव करा लें... झारखंड में विधानसभा चुनाव जीतने का भाजपा का सपना ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ जैसा होगा। भाजपा कई राज्यों में आदिवासियों को मुख्यमंत्री बना रही है, लेकिन वे सिर्फ ‘रबर स्टाम्प’ हैं।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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