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Haryana Election Result: कांग्रेस के जिन तीन नेताओं के खिलाफ ईडी ने की थी कार्रवाई, जानें क्या हुआ उनका?

Congress in Haryana: क्या आप जानते हैं कि हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस के उन तीन नेताओं का क्या हुआ, जिनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक्शन लिया। इन तीनों नेताओं का नाम राव दान सिंह, धर्म सिंह छोकर और सुरेंद्र पंवार है। आपको बताते हैं कि चुनावी नतीजों में इन तीनों का क्या हुआ।

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सुरेंद्र पंवार, धर्म सिंह छोकर और राव दान सिंह।

Haryana Election Result: हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे मंगलवार को घोषित हो गए। चुनाव आयोग के मुताबिक, भाजपा ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत हासिल की है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के तीन करीबी नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा है, जिन्होंने चुनाव से पहले ईडी की कार्रवाई का सामना किया था। आइए जानते हैं कि वे तीन नेता कौन हैं और कहां से दावेदारी ठोक रहे थे।

कांग्रेस के इन तीन नेताओं के खिलाफ ईडी ने लिया था एक्शन

हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के जिन तीन नेताओं को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच का सामना करना पड़ा था, उनमें राव दान सिंह, धर्म सिंह छोकर और सुरेंद्र पंवार शामिल हैं।

महेंद्रगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार को मिली हार

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार राव दान सिंह की बात करें तो वह हरियाणा की महेंद्रगढ़ विधानसभा सीट से चुनावी ताल ठोक रहे थे। उन्हें भाजपा प्रत्याशी कंवर सिंह ने 2,648 वोट से मात दी है। राव दान सिंह ने पिछली बार महेंद्रगढ़ से चुनाव लड़ा था और बड़ी जीत हासिल की थी। इसी साल ईडी ने जुलाई में उनके खिलाफ 1,392 करोड़ रुपये के घोटाले के कार्रवाई की थी। बाद में उनके बेटे अक्षत सिंह की संपत्ति को भी अटैच किया गया था।

धर्म सिंह छोकर को भी समालखा से भाजपा ने दी शिकस्त

वहीं, इस लिस्ट में दूसरा नाम धर्म सिंह छोकर का है, जो समालखा से चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें भाजपा प्रत्याशी मनमोहन भड़ाना ने 19,315 वोटों के अंतर से हराया। इसी साल जुलाई में ईडी की टीम ने कांग्रेस नेता धर्म सिंह छोकर के ठिकानों पर गुरुग्राम में 1500 फ्लैट से जुड़े मामले में कार्रवाई की थी। बाद में ईडी की टीम ने कई अहम दस्तावेजों को जब्ज किया था। यहीं नहीं, छोकर के बेटे को भी ईडी ने गिरफ्तार किया था।

सुरेंद्र पंवार को भी सोनीपत सीट से झेलनी पड़ी करारी हार

इसके अलावा ईडी की रडार पर कांग्रेस के तीसरे नेता सुरेंद्र पंवार थे। उन्होंने हरियाणा की सोनीपत विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, मगर उन्हें भी राव दान सिंह और धर्म सिंह छोकर की तरह हार का सामना करना पड़ा। उन्हें भाजपा प्रत्याशी निखिल मदान ने 29,627 वोटों से हराया।

सुरेंद्र पंवार के खिलाफ भी ईडी ने इसी साल जुलाई में कार्रवाई की थी। ये कार्रवाई अवैध खनन के मामले में दर्ज हुई एफआईआर के आधार पर की गई थी। इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने उनके आवास पर रेड की और सुरेंद्र पंवार को सोनीपत से गिरफ्तार किया। हालांकि, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित कर दिया, इससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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