Rajasthan new district: अशोक गहलोत को यूं ही नहीं सही समय पर ट्रंप कार्ड के लिए नहीं कहा जाता। याद करिए 2018 का वो साल था, राजस्थान में शहर शहर गांव गांव सचिन पायलट कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर लोगों के बीच में थे और उसका असर नतीजों पर भी नजर आया। वसुंधरा राजे सिंधिया सत्ता से बेदखल हो चुकी थीं। लेकिन जब सीएम की कुर्सी पर बैठते बैठते वो रह गए, बाजी अशोक गहलोत के हाथ लग गई। अब एक बार फिर अशोक गहलोत ने 19 जिलों के गठन के तौर पर ट्रंप कार्ड चला है जिसे सियासी तौर पर चुनावी लड़ाई के लिए अहम माना जा रहा है। यहां पर हम बताएंगे कि यह कांग्रेस खासतौर से गहलोत के लिए कितना अहम है और बीजेपी क्यों खफा है।
ये हैं कुल 19 जिले
अनूपगढ़, ब्यावर, डीग, बालोतरा, दूदू, जयपुर उत्तर, जयपुर दक्षिण, जयपुर पूर्व जयपुर पश्चिम, बालोतरा, गंगापुर सिटी, कोटपुतली, बहरोड़, गंगापुर सिटी, नीम का थाना, खैरतल, सांचोर, फलौदी, सलुंबर और शाहपुरा।अब जिन मौजूदा जिलों में से नए जिलों का गठन किया गया उनमें जयपुर में 19 सीट, सीकर में 8 सीट, जोधपुर में 10 सीट, श्रीगंगानगर में 6 सीट, बाड़मेर में 7, नागौर में 7, भरतपुर में 7, जालोर में 5, उयदपुर में 4, पाली में 6, बांसवाड़ा में 5 , अलवर में 11, अजमेर में 8 सीट और सवाई माधोपुर में चार सीट हैं।
क्या कहते हैं जानकार
जानकार बता रहे हैं कि इस फैसले से करीब 113 विधानसभा पर असर पड़ेगा। जिन जिलों को बनाया गया है उसकी मांग बहुत पहले से चल रही थी।अगर बात जयपुर की करें तो इसमें चार जिलों का गठन किया गया है। जिसे लेकर कई दफे धरना प्रदर्शन भी हुआ था।सांचोर जिले की मांग सुखराम विश्नोई, कोटपुतली और बहरोड की मंदग राजेंद्र यादव, डीग की मांग विश्वेंद्र सिंह और गोविंद सिंह डोटासरा सीट की मांग कर रहे थे। बताया जाता है कि ये सभी चेहरे अशोक गहलोत के खासमखास है। इस फैसले के जरिए गहलोत ने पार्टी और कार्यकर्ताओं पर पकड़ मजबूत की है।
