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Faridabad Vidhan Sabha Chunav 2024, फरीदाबाद विधान सभा सीट: जीत की हैट्रिक लगाने की फिराक में भाजपा, कांग्रेस ने भी कसी कमर; जानिए इस हॉट सीट के सियासी समीकरण

Faridabad Haryana Vidhan Sabha Chunav 2024, Faridabad Constituency, History, Party, Key Candidate: फरीदाबाद में पंजाबी, वैश्य और अनुसूचति जाति के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, फरीदाबाद में इस बाद 2.60 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसमें 1.39 लाख पुरुष और 1.20 लाख महिला वोटर्स हैं।

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फरीदाबाद विधानसभा चुनाव।

Photo : Times Now Digital

Faridabad Haryana Vidhan Sabha Chunav 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यहां 5अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 8 अक्टॅबर को मतगणना होगी। इस चुनाव में कुछ सीटों पर मुकाबला बड़ा रोचक होने वाला है, इनमें फरीदाबाद जैसी विधानसभा सीट भी शामिल है। दिल्ली से सटी होने के कारण यह हॉट सीट बन गई है। बीते दो विधानसभा चुनाव से फरीदाबाद में भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। पार्टी यहां जीत की हैट्रिक लगाने की तलाश में है, लेकिन इस बाद कांग्रेस के सामने उसकी राह आसान नहीं होगी।

फरीदाबाद की बात करें भाजपा नेता नरेंदर गुप्ता इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन इस बाद पार्टी ने विपुल गोयल को मैदान में उतारा है। वहीं, कांग्रेस ने एक बार फिर से लखन कुमार सिंगला को टिकट दिया है। इसके अलावा आईएनएलडी ने सुनयना सिंह चौटाला को मैदान में उतारा है।

कैसे हैं समीकरण

हरियाणा की फरीदाबाद सीट 2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। यहां हुए पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, इसके बाद से यह सीट भाजपा के कब्जे में है। जातीय समीकरणों की बात करें तो फरीदाबाद में पंजाबी, वैश्य और अनुसूचति जाति के मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। चुनाव आयोग के मुताबिक, फरीदाबाद में इस बाद 2.60 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसमें 1.39 लाख पुरुष और 1.20 लाख महिला वोटर्स हैं।

2019 में भाजपा के नरेंदर गुप्ता ने हासिल की थी जीत

फरीदाबाद विधानसभा सीट पर 2019 में हुए चुनाव में भाजपा के नरेंदर गुप्ता ने जीत हासिल की थी। उन्हें 65887 हजार वोट मिले थे, वहीं 44174 वोट के साथ लखन कुमार सिंगला दूसरे स्थान पर रहे थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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