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इन एग्जिट पोल में भाजपा की बल्ले-बल्ले: MP में शिव 'राज' तो राजस्थान में नहीं टूट रहा 'रिवाज', आई बड़ी खुशखबरी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Dec 1, 2023, 09:33 AM IST

Exit Poll 2023: मध्य प्रदेश में पार्टी यहां अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है तो राजस्थान के रण में भी वो बाजी मारती दिखाई दे रही है। तेलंगाना में पार्टी के पास खोने के लिए कुछ नहीं था। लिहाजा, उसे कुछ सीटों का फायदा जरूर मिल सकती है।

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एग्जिट पोल 2023

Photo : Twitter

Exit Poll 2023: पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल सामने आ चुके हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद काफी हद तक यह भी साफ हो चुका है कि कहां किस पार्टी की सरकार बन रही है। हालांकि, अंतिम नतीजे तो चुनाव आयोग 3 दिसंबर को ही जारी करेगा। लेकिन इससे पहले 2024 की सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे विधानसभा चुनावों के एग्जिट पोल भाजपाई खेमे लिए खुशियां लेकर आए हैं।

मध्य प्रदेश में पार्टी यहां अपनी सत्ता बचाती हुई दिख रही है तो राजस्थान के रण में भी वो बाजी मारती दिखाई दे रही है। तेलंगाना के नतीजे भी पार्टी के लिए ठीक ही रहे हैं। यहां पार्टी के लिए खोने के लिए कुछ नहीं था। हालांकि, एग्जिट पोल में उसे कुछ सीटों का फायदा जरूर मिल रहा है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में जरूर भाजपा को झटका लगा है।

मध्य प्रदेश में फिर से होगी वापसी!

भाजपा के लिए सबसे अहम मध्य प्रदेश के नतीजे हैं। यहां लंबे समय से सत्ता में काबिज भाजपा एंटी-इन्कंबेसी से जूझ रही थी। कहा जा रहा था कि इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है और कांग्रेस उलटफेर कर सकती है। हालांकि, टाइम्स नाउ-ईटीजी के एग्जिट पोल ने भाजपा को खुशखबरी दी है। एजेंसी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार यहां भाजपा 105 से 117 सीटें हासिल कर सरकार बना सकती है। कांग्रेस को 109 से 12 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं जन की बात एग्जिट पोल में भी भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है।

राजस्थान से भी आई खुशखबरी

राजस्थान के एग्जिट पोल कांग्रेस के लिए निराशा तो भाजपा के लिए खुशखबरी लेकर आए हैं। राज्य के एग्जिट पोल में टाइम्स नाउ-ईटजी ने भाजपा को 108 से 128 सीटें दी हैं। वहीं कांग्रेस को यहां सीटों को नुकसान हो रहा है और वह 56 से 72 सीटों पर सिमट सकती है। एबीपी सी वोटर के सर्वे में भाजपा को 94 से 114 और कांग्रेस को 71 से 91 सीटें मिल रही हैं।

इन राज्यों में नहीं चला जादू

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना ऐसे राज्य हैं, जहां भाजपा को निराशा हाथ लगी है। भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार यहां सत्ता में दोबारा लौटती हुई दिखाई दे रही है। टाइम्स नाउ ईटीजी के सर्वे में भाजपा को 32 से 40 सीटें मिल ने अनुमान लगाया गया है, कांग्रेस को यहां 48 से 56 सीटें मिल रही हैं। वहीं न्यूज 24 चाणक्या के सर्वे में भाजपा को 25 से 41 और कांग्रेस को 49 से 65 सीटें मिलती दिख रही हैं। तेलंगाना के एग्जिट पोल चौंकाने वाले हैं। यहां कांग्रेस को सबसे बड़ा फायरा हो रहा है और पार्टी सत्ता में आती हुई दिखाई दे रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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