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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025: एक साल में उजाड़ देंगे दिल्लीवालों की झुग्गियां; केजरीवाल ने भाजपा पर लगा दिया ये संगीन इल्जाम

Delhi Chunav 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच दमदार मुकाबला देखने को मिल रहा है। इस बीच आप के मुखिया और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर संगीन इल्जाम लगाया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा को वोट दिया तो एक साल में आपकी झुग्गियां उजाड़ देंगे।

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अरविंद केजरीवाल।

Delhi Vidhan Sabha Chunav 2025: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रविवार को शकूरपुर बस्ती स्थित झुग्गी पहुंचे, जहां उन्होंने प्रेसवार्ता कर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जैसे–जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ठीक वैसे-वैसे भाजपा का झुग्गवालों को लेकर प्रेम बढ़ता जा रहा है।

'भाजपा को वोट दे दिया, तो अपनी आत्महत्या पर साइन कर दोगे'

उन्होंने कहा कि मैं एक बात कहना चाहता हूं कि अगर दिल्ली के झुग्गीवालों ने भाजपा को वोट दे दिया, तो ऐसा करके आप लोग अपनी आत्महत्या पर साइन कर दोगे। ये लोग आप लोगों को मार देंगे। ये लोग आपकी झुग्गी को तोड़ देंगे। इन लोगों ने सारी प्लानिंग कर रखी है। पिछले दस सालों में भाजपा ने तीन लाख लोगों को बेघर कर दिया है।

‘आप’ नेता ने कहा कि आज मैं अमित शाह को चैलेंज करने वाला हूं। अमित शाह जी ने दस सालों में जितनी झुग्गीवालों को उजाड़ा है, उन सभी केस को कोर्ट से वापस ले लें। कोर्ट के अंदर एफिडेविट फाइल कर दो कि जितनी झुग्गियां तोड़ी हैं, उनको वापस बसाएंगे। आपने जिन-जिन लोगों को उजाड़ा था, उन्हें उसी जमीन पर वापस नहीं लाते, तो केजरीवाल चुनाव नहीं लड़ेगा।

उन्होंने भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह अमीरों की पार्टी है। इन लोगों ने पिछले पांच-दस सालों में आज तक झुग्गीवालों की सुध नहीं ली, लेकिन अब चुनाव नजदीक आ रहे हैं, तो इनके नेता झुग्गी में जाकर सो रहे हैं। ये लोग तो झुग्गीवालों को कीड़े-मकोड़े समझते हैं।

झुग्गी के लोगों को झूठ बोलकर गुमराह किया- केजरीवाल का दावा

उन्होंने केंद्रीय मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि बीते दिनों उन्होंने दिल्ली के कई इलाकों से झुग्गी के लोगों को बुलाया था, जहां उन्होंने मुझे चुन-चुन कर गालियां दी थीं। अमित शाह जी गृह मंत्री हैं। गृह मंत्री की अपनी एक गरिमा होती है। लेकिन, उन्होंने जिस तरह से मेरे लिए शब्दों का इस्तेमाल किया, उससे हर किसी को शर्म आएगी, लेकिन मुझे अमित शाह जी से कोई द्वेष नहीं है। मैं मान-सम्मान के लिए राजनीति में नहीं आया हूं। मैं देश के मान-सम्मान के लिए राजनीति में आया हूं। लेकिन, अमित शाह जी ने जिस तरह झुग्गी के लोगों को झूठ बोलकर गुमराह किया है, आज हम उसी झूठ का पर्दाफाश करने आए हैं।

उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग कह रहे हैं कि जहां झुग्गी वहीं मकान, लेकिन भाजपा के लोग यह नहीं बता रहे हैं कि किसका मकान? उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि जहां झुग्गी वहां इनके (भाजपा) दोस्त का मकान, जहां झुग्गी वहां बिल्डरों के मकान। जहां झुग्गी वहां झुग्गीवालों के मकान के बारे में ये लोग बात नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों से भाजपा की सरकार है, लेकिन अभी तक सिर्फ 4 हजार 700 मकान ही इन लोगों ने झुग्गीवालों के लिए बनाए हैं, जबकि दिल्ली में 10 लाख झुग्गी हैं। ऐसी स्थिति में दिल्ली में 1 हजार साल झुग्गीवालों को मकान देने में लगेंगे। इन लोगों ने झुग्गी को तोड़कर लोगों को बेघर करने का प्लान बनाया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा के लोग बड़े ही बेशर्म हैं। ये लोग झुग्गी में जाकर सो रहे थे, जबकि 27 दिसंबर को एलजी ने इस झुग्गी की जमीन का लैंड यूज चेंज कर दिया और ये लोग झुग्गी के बच्चों के साथ आकर कैरम बोर्ड खेल रहे हैं। जैसे ही चुनाव आठ फरवरी को समाप्त हो जाएंगे, ये लोग झुग्गी तोड़ देंगे। 2015 में इन लोगों ने इस झुग्गी को तोड़ने की कोशिश की थी। तब मैं मुख्यमंत्री बन चुका था, मैंने तब सभी अफसरों को बुलाकर झुग्गी नहीं तोड़ने दी थी। लेकिन, मुझे इस बात का दुख है कि उस दौरान बुलडोजर लाने की वजह से हुई अफरातफरी में छह साल की छोटी बच्ची की मौत हो गई थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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