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बिहार चुनाव में चिराग पासवान का क्या होगा? खुद बताया अपनी पार्टी का पूरा प्लान

बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी उठापटक को देखते हुए खींचतान तेज हो गुई है। इस बीत चिराग पासवान ने कहा है कि एनडीए में 'विनिंग कॉम्बिनेशन', ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि अमित शाह बिहार में मौजूद हैं। इस दौरान वे इस बात को समझेंगे कि जनता को इस गठबंधन से क्या आशाएं हैं।

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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान

Chirag Paswan Plan for Bihar Election: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बिहार के दो दिवसीय दौरे पर हैं। इस बीच एनडीए घटक दलों में शामिल लोजपा (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि एनडीए को गौर से देखें तो इसमें विनिंग कॉम्बिनेशन है। आने वाले चुनाव में यह गठबंधन ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा।

बिहार चुनाव के लिए क्या है चिराग पासवान का प्लान?

चिराग पासवान और उनकी पार्टी इस बार के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार का विरोध नहीं करेगी। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार के चुनाव के समीकरण बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव का वर्ष है। एनडीए के साथी समय-समय पर मिलकर एक-दूसरे को समझ रहे हैं। कुछ दिन पहले हमारी दिल्ली में मुलाकात हुई थी।

पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह गठबंधन मजबूती से आगे बढ़ रहा है, जबकि विपक्ष में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। वे न चेहरा तय कर पा रहे हैं, न गठबंधन का स्वरूप तय कर पा रहे हैं। राजद और कांग्रेस में जिस तरह से दरारें देखने को मिल रही हैं, वह यह दर्शाता है कि एक तरफ विपक्ष बिखरा हुआ है, तो वहीं दूसरी तरफ मजबूत एनडीए है।

बिहार में अमित शाह, तो क्या सीट शेयरिंग पर बनेगी बात?

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि अमित शाह बिहार में मौजूद हैं। इस दौरान वे इस बात को समझेंगे कि जनता को इस गठबंधन से क्या आशाएं हैं। साथ ही गठबंधन के साथियों के साथ मुलाकात में यह भी विचार किया जाएगा कि हम और बेहतर कर सकें। इस दिशा में भी चर्चा होगी।

चारा घोटाले में गबन की गई राशि को वापस लिए जाने के बिहार सरकार के प्रयास पर उन्होंने कहा कि घोटाले की राशि वसूलना बिल्कुल सही है। ये जनता का पैसा है, वापस आना ही चाहिए। लुटे गए पैसे जनता के थे। विधानसभा चुनाव में एनडीए के चेहरे को लेकर उन्होंने कहा कि हमारा नेता कौन होगा, किसके चेहरे पर चुनाव लड़ेंगे, हमारे लिए ये मुद्दा है ही नहीं। आज की बैठक में हम लोग उससे आगे बढ़ेंगे। सभी घटक दलों के प्रदेश अध्यक्ष सभी जिलों में कार्यकर्ता सम्मेलन कर रहे हैं। इससे एकजुटता का संदेश गया है।

'महागठबंधन के लिए मुश्किल होने वाला है सीट बंटवारा'

चिराग पासवान ने कहा कि महागठबंधन में सब कुछ को लेकर लड़ाई है। अभी तो असली लड़ाई सीट शेयरिंग को लेकर होगी। पिछली बार कांग्रेस को 70 सीट मिली थी, तो इस बार भी कम से कम उतना ही मांगेगी। सीट बंटवारा महागठबंधन के लिए मुश्किल होने वाला है। एनडीए में बड़ी सहजता से यह कार्य होगा।

वक्फ संशोधन बिल पर उन्होंने कहा कि शुरू से हम लोगों ने स्पष्ट कर के रखा था कि सबकी बात सुननी चाहिए। तभी यह बिल जेपीसी में गया। हमारी पार्टी के लोग भी उस समिति में थे। कई मुस्लिम संगठन हैं, जो बदलाव के समर्थन में हैं। सड़कों पर नमाज और नवरात्रि में मीट की दुकानों को बंद करने पर उन्होंने कहा कि ये सब फालतू बातें हैं। शुरू से सारे धर्मों के लोग शांति से अपना पर्व मनाते रहे हैं। इस पर चर्चा होनी ही नहीं चाहिए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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