बिहार में दो-तिहाई से ज़्यादा बहुमत हासिल करके भाजपा के भारी जीत की ओर बढ़ने के बीच, भाजपा ने विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है और आरोप लगाया है कि कांग्रेस नेता लगातार चुनावी हार का प्रतीक बन गए हैं। चुनाव से पहले, राहुल गांधी ने 20 जिलों में 16 दिनों की मतदाता अधिकार यात्रा की थी, जिसमें उन्होंने 'वोट चोरी' को उजागर किया और चुनाव आयोग पर भाजपा के साथ मिलकर अपनी जीत सुनिश्चित करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इस अभियान को एक 'वोट चोर' सरकार से 'संविधान बचाने की लड़ाई' के रूप में प्रस्तुत किया। गांधी बिहार में कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में से एक थे। हालांकि, उनकी राजनीतिक बयानबाजी वोटों में तब्दील नहीं हो सकी, क्योंकि कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक शर्मनाक हार की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
कांग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा, 'राहुल गांधी! एक और चुनाव, एक और हार! अगर चुनावी निरंतरता (चुनाव हारने) के लिए कोई पुरस्कार होते, तो वह सभी जीत जाते। इस स्थिति में, असफलताएं भी सोच रही होंगी कि उन्हें इतनी विश्वसनीयता कैसे मिल जाती है।'
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस का मज़ाक उड़ाने के लिए कवि कबीर दास के एक दोहे का हवाला दिया, उन्होंने कहा, '150 और 175 सीटें पार करने के बाद अब हम 200 की ओर बढ़ रहे हैं...मैं कांग्रेस के लिए कबीर दास की एक पंक्ति उद्धृत करना चाहूंगा, उन्हें समझना चाहिए कि 'बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिल्या कोई। जो मन खोजा अपना, तो मुझसे बुरा न कोई।'
मतगणना शुरू होने के बाद से बढ़त बनाए हुए भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को फिलहाल 199 सीटों के साथ बढ़त हासिल है। राजद के नेतृत्व वाला महागठबंधन 38 सीटों के साथ पीछे है, जबकि कांग्रेस सिर्फ़ चार सीटों पर आगे है। एनडीए में भाजपा 90 सीटों पर, जदयू 81 सीटों पर और चिराग पासवान की लोजपा 21 सीटों पर आगे है।
वहीं यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि मतगणना के रुझान भाजपा की स्थिति की पुष्टि करते हैं। 'मतगणना के रुझान स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि बिहार की जनता का रुख स्पष्ट है- न जंगलराज, न कट्टाराज, न गुंडाराज, न तुष्टिकरण, न भाई-भतीजावाद, न घोटाला, न भ्रष्टाचार, न अहंकार और न जातिवाद। बिहार केवल सुशासन, विकास और पारदर्शी नेतृत्व को स्वीकार करता है'
