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Simri Bakhtiyarpur Chuvan 2025: कांग्रेस के गढ़ में RJD का सिक्का, क्या RJD को नशीब होगी दूसरी जीत? सिमरी बख्तियारपुर सीट का क्या है समीकरण

Simri Bakhtiyarpur Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सिमरी बख्तियारपुर सीट पर 6 नवंबर को मतदान होना है और 14 नवंबर को परिणाम आएंगे। इस बार आरजेडी और बीजेपी के बीच टक्कर है, बीजेपी के अरुण कुमार एलजेपी (आर) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं सिटिंग विधायक आरजेडी के अनिरद्ध कुमार ने नामांकन किया।

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सिमरी बख्तियारपुर सीट

Simri Bakhtiyarpur Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का चुनावी माहौल अंतिम चरण पर है। राज्य में 6 नवंबर को पहले चरण का मतदान होना है। गहमागहमी में सहरसा जिले की सिमरी बख्तियारपुर सीट पर हर किसी की नजर टिकी है। खगड़िया लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह विधानसभा सीट राजनीतिक दृष्टिकोण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक समीकरणों के लिहाज से भी बेहद अहम है। बख्तियारपुर सीट पर इस बार आरजेडी और बीजेपी के बीच टक्कर है, बीजेपी के अरुण कुमार एलजेपी (आर) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तो वहीं सिटिंग विधायक आरजेडी के अनिरद्ध कुमार ने नामांकन किया।

सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल स्तरीय कस्बा है, जो आसपास के गांवों को बड़े बाजारों से जोड़ने का मुख्य केंद्र है। यह सहरसा जिले का दूसरा सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। क्षेत्र का भूभाग समतल और उपजाऊ है, जहां धान, गेहूं और मक्का की खेती बड़े पैमाने पर होती है। साथ ही मखाने की खेती यहां की पहचान बन चुकी है, जिसकी मांग देश से लेकर विदेश में भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि मखाना खेती ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दिया है। इसके अलावा चावल मिल और ईंट भट्ठे जैसे लघु उद्योग भी लोगों को रोजगार मुहैया कराते हैं।

भौगोलिक स्थिति की बात करें तो सहरसा मुख्यालय यहां से 20 किमी, मधेपुरा 30 किमी, खगड़िया 45 किमी, मुंगेर 83 किमी और बेगूसराय 106 किमी दूर है। राज्य की राजधानी पटना की दूरी लगभग 190 किमी है। सिमरी बख्तियारपुर राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे स्टेशन से जुड़ा होने के कारण बेहतर कनेक्टिविटी रखता है।

बख्तियारपुर विधानसभा का चुनावी इतिहास

सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा की स्थापना 1951 में हुई थी और 1952 में पहली बार चुनाव संपन्न हुआ। हालांकि पहले परिसीमन आयोग की सिफारिश पर यह सीट खत्म कर दी गई थी, लेकिन 1967 में दोबारा स्थापित हुई और 1969 से यहां नियमित रूप से चुनाव हो रहे हैं। अब तक यहां 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2009 और 2019 के दो उपचुनाव भी शामिल हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने सबसे अधिक आठ बार जीत हासिल की है। जदयू चार बार विजयी रहा है, जबकि राजद ने 2019 के उपचुनाव में पहली बार कब्जा जमाया और 2020 में भी अपनी पकड़ बरकरार रखी। इसके अलावा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी और जनता दल ने एक-एक बार जीत दर्ज की है।

2005, 2010 और 2015 में यह सीट जदयू के कब्जे में रही, जिसमें दिनेश चंद्र यादव ने लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं 2019 के उपचुनाव में राजद के युसुफ सलाउद्दीन ने जीत हासिल कर समीकरण बदल दिए और 2020 के चुनाव में भी उन्होंने वीआईपी के मुकेश सहनी को हराकर सीट अपने पास रखी। इससे यह साफ है कि अब इस क्षेत्र में भाजपा की प्रत्यक्ष मौजूदगी उतनी दमदार नहीं है और मुख्य मुकाबला जदयू और राजद के बीच ही देखने को मिलता है।

बख्तियारपुर विधानसभा पर कितने मतदाता

2024 के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा की अनुमानित जनसंख्या 5,91,400 है। इसमें 3,02,767 पुरुष और 2,88,633 महिलाएं शामिल हैं। वहीं, कुल मतदाता संख्या 3,51,506 है, जिनमें 1,82,540 पुरुष, 1,68,950 महिलाएं और 16 थर्ड जेंडर मतदाता हैं।

ये वोटर्स हैं जीत के फैक्टर

यहां का राजनीतिक समीकरण जातिगत आधार पर काफी हद तक प्रभावित होता है। यादव, मुस्लिम, कुशवाहा और दलित वोटर्स निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि राजद को यहां सामाजिक आधार मिला, जबकि जदयू ने विकास और व्यक्तिगत छवि पर चुनावी जीत दर्ज की।

स्थानीय मुद्दों की बात करें तो बाढ़ नियंत्रण, मखाना उद्योग को बढ़ावा, सड़क-रेल कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सुविधाएं और युवाओं को रोजगार जैसे मुद्दे चुनावी बहस का केंद्र बने हुए हैं। जनता इस बार उन प्रत्याशियों की ओर झुक सकती है जो बाढ़ और पलायन जैसी गंभीर समस्याओं का ठोस समाधान पेश करेंगे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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