इलेक्शन

Forbesganj Vidhan Sabha Seat: इस सीट पर कांग्रेस और BJP के बीच रहती है सीधी टक्कर, ब्रिटिश राज से जुड़ा है इस सीट का इतिहास

Forbesganj Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का शंखनाद हो चुका है। फारबिसगंज सीट पर बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी और आरजेडी, कांग्रेस गठबंधन से कड़ा मुकाबला होगा। 2020 के विधानसभा चुनाव में फारबिसगंज सीट पर BJP उम्मीदवार विद्या सागर केशरी ने 102130 वोट हासिल कर जीत हासिल की थी। उन्होंने INC प्रत्याशी जाकिर हुसैन खान को हराया जिनके हिस्से 82381 वोट आए।

Image

पढ़ें फारबिसगंज विधानसभा सीट की राजनीतिक समीकरण।(फोटो सोर्स: टाइम्स नाउ डिजिटल)

Forbesganj Election 2025: फारबिसगंज न सिर्फ बिहार की राजनीति का अहम केंद्र है, बल्कि नेपाल सीमा के करीब होने की वजह से यह इलाका सामाजिक और आर्थिक रूप से भी खासा संवेदनशील माना जाता है। अररिया जिले की यह सामान्य वर्ग की विधानसभा सीट, 1951 में अस्तित्व में आई थी और तब से अब तक 17 बार चुनावी संग्राम देख चुकी है। यहां के वोटरों का मिजाज अक्सर पूरे सीमांचल की राजनीतिक दिशा तय करता रहा है।

2020 के विधानसभा चुनाव में फारबिसगंज में 3,40,760 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से करीब 33.8% मुस्लिम मतदाता थे। 2024 के लोकसभा चुनाव तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,56,438 हो गई। यह सीट हमेशा बेहतर मतदान प्रतिशत के लिए जानी जाती है, हालांकि 2020 में वोटिंग घटकर 60.56% रही, जो पिछले तीन चुनावों में सबसे कम थी।

2020 विधानसभा चुनाव का परिणाम

बात करें 2020 विधानसभा चुनाव की तो इस सीट पर BJP के कैंडिडेट विद्या सागर केशरी ने 102130 वोट हासिल कर जीत हासिल की थी। उन्होंने INC प्रत्याशी जाकिर हुसैन खान को हराया जिनके हिस्से 82381 वोट आए।

भौगोलिक रूप से फारबिसगंज, बिहार के उत्तर-पूर्वी सिरे पर, नेपाल की सीमा से महज आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पटना से करीब 300 किलोमीटर दूर, यह कस्बा सड़क और रेल दोनों से जुड़ा हुआ है।

कोसी और परमान नदियों के जलग्रहण क्षेत्र में बसे इस इलाके की मिट्टी बेहद उपजाऊ है, लेकिन मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की समस्या यहां की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। बावजूद इसके, कृषि ही स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यहां धान, गेहूं, मक्का और दालें मुख्य फसलें हैं, जबकि कुछ इलाकों में जूट, सब्जियां और तिलहन की खेती भी की जाती है।

बता दें कि फारबिसगंज का नाम ब्रिटिश अफसर अलेक्जेंडर फोर्ब्स के नाम पर पड़ा था। औपनिवेशिक काल में यह जगह अपनी रेलवे कनेक्टिविटी और व्यापारिक गतिविधियों की वजह से तेजी से विकसित हुई। समय के साथ यह एक शैक्षणिक और प्रशासनिक केंद्र के रूप में उभरा है।

इस सीट का इतिहास

राजनीतिक तौर पर, फारबिसगंज की कहानी कांग्रेस के प्रभुत्व से शुरू हुई और धीरे-धीरे भाजपा के गढ़ में बदल गई। 1952 से 1985 के बीच कांग्रेस ने यहां नौ में से आठ बार जीत दर्ज की। सरयू मिश्रा, जिन्होंने 1962 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से जीत हासिल की थी, बाद में कांग्रेस में शामिल हुए और लगातार छह बार विधायक बने। यह आज भी एक रिकॉर्ड है।

भाजपा ने 1990 में मयानंद ठाकुर की जीत के साथ यहां अपनी मजबूत एंट्री की। इसके बाद लक्ष्मी नारायण मेहता, पद्म पराग रॉय और विद्यासागर केशरी जैसे नेताओं ने पार्टी की पकड़ मजबूत की। 2015 में केशरी ने राजद के कृत्यानंद बिस्वास को 25,238 वोटों से हराया, जबकि 2020 में उनका अंतर घटकर 19,702 वोट रह गया, जब कांग्रेस के जाकिर हुसैन खान उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी थे।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article