Digha Assembly Constituency (दीघा विधानसभा सीट): पटना जिले की दीघा विधानसभा सीट इस बार भी चुनावी चर्चाओं के केंद्र में है। 2008 में परिसीमन के बाद बनी यह सीट 2010 में पहली बार चुनावी मैदान में आई थी। तब जेडीयू की पूनम देवी ने जीत हासिल की थी। लेकिन उसके बाद की कहानी पूरी तरह बदल गई। दो लगातार विधानसभा चुनावों (2015 और 2020) में यहां बीजेपी की जीत दर्ज हुई और संजीव चौरसिया ने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत की।
महिला वोटर बनातीं समीकरण
दीघा सीट की सबसे बड़ी विशेषता है इसका महिला वोट बैंक। माना जाता है कि यहां महिलाओं का झुकाव जिस पार्टी की तरफ होता है, जीत उसी को मिलती है। इस बार भी महिला वोटरों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। पिछले चुनाव में महिलाओं की भागीदारी में काफी उछाल देखा गया था।
बीजेपी को मिलता फायदा
दीघा सीट लगभग पूरी तरह शहरी है। पटना नगर निगम के 14 वार्ड और छह पंचायतें यहां शामिल हैं। पाटलिपुत्र कॉलोनी जैसे पॉश इलाके भी इसी क्षेत्र का हिस्सा हैं। शहरी मतदाता और कायस्थ समाज का समीकरण यहां पहले दिन से बीजेपी को बड़ा फायदा देता रहा है। यही वजह है कि 2009 से लेकर 2024 तक लगातार चार लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी को इस क्षेत्र में बढ़त मिलती रही है।
दीघा में कब होंगे चुनाव (Digha Election Date)
| नोटिफिकेशन की तारीख | 10 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन की आखिरी तारीख | 17 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन जांच की आखिरी तारीख | 18 अक्टूबर 2025 |
| नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख | 20 अक्टूबर 2025 |
| मतदान | 6 नवंबर 2025 |
| चुनाव नतीजे | 14 नवंबर 2025 |
जातीय समीकरण का भी असर
दीघा में कायस्थ वोटर्स की संख्या अच्छी मानी जाती है, जिन्हें बीजेपी का पारंपरिक समर्थन हासिल है। इसके साथ ही यादव, राजपूत, भूमिहार, ब्राह्मण, कोइरी और कुर्मी समुदाय के वोट भी यहां निर्णायक माने जाते हैं। 2020 के आंकड़ों के अनुसार, यहां अनुसूचित जाति वोटर 10.68%, मुस्लिम वोटर 9.4% और ग्रामीण वोटर केवल 1.76% हैं।
इस बार मुकाबला दिलचस्प
2020 में यहां 4,60,868 वोटर थे, जो 2024 की लोकसभा तक बढ़कर 4,73,108 हो गए हैं। इस बार महागठबंधन की ओर से सीपीआई (एमएल) की दिव्या गौतम मैदान में हैं, जो लेफ्ट की इकलौती महिला उम्मीदवार हैं और दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कजिन भी हैं। वहीं बीजेपी ने फिर से संजीव चौरसिया पर भरोसा जताया है।
