इलेक्शन

Danapur Assembly Election 2025: दानापुर में फिर मचेगा सियासी संग्राम, आरजेडी और बीजेपी की रोमांचक टक्कर में किसकी होगी जीत? जानें इस विधानसभा सीट का समीकरण

Danapur Assembly Election 2025: दानापुर विधानसभा सीट एक बार फिर बिहार की सियासत के केंद्र में है। शहरी, ग्रामीण और दियारा क्षेत्रों के मिश्रण वाला यह इलाका विकास परियोजनाओं के बावजूद बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। आगामी 2025 चुनाव में यहां बीजेपी और आरजेडी के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिल सकता है, जिसमें जातीय समीकरण अहम भूमिका निभाएंगे।

Image

दानापुर विधानसभा चुनाव

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Danapur Assembly Election 2025: बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाने वाली दानापुर विधानसभा सीट एक बार फिर चुनावी सुर्खियों में है। आगामी 2025 विधानसभा चुनाव में यहां लगभग 3,74,193 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जानकारी के मुताबिक, दानापुर का क्षेत्र विशेष रूप से विविध है, जिसमें शहरी, ग्रामीण और दियारा तीनों प्रकार के इलाके शामिल हैं। क्षेत्र में मेट्रो और एलीवेटेड रोड जैसी कई विकास परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन जल निकासी की समस्या, बाढ़ की स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी मूलभूत चुनौतियां अब भी लोगों की चिंता का कारण बनी हुई हैं। इस सीट पर पहले चरण के अंतर्गत 6 नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी।

दानापुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

दानापुर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। अब तक इस सीट पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने पांच-पांच बार जीत दर्ज की है, जबकि आरजेडी और जनता दल मिलकर भी पांच बार विजयी रहे हैं। 1985 में यहां एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी जीत हासिल की थी। इस सीट पर 1957 में कांग्रेस के जगत नारायण लाल ने पहली बार जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1962 और 1967 में सोशलिस्ट पार्टी के रामसेवक सिंह ने लगातार जीत हासिल की।

1995 में लालू प्रसाद यादव ने दर्ज की जीत

कांग्रेस के बुद्धदेव सिंह ने 1969 और 1980 में सफलता पाई। 1977 में ‘शेरे बिहार’ कहलाने वाले रामलखन सिंह यादव विधायक बने। वर्ष 1995 में लालू प्रसाद यादव ने यहां से जीत दर्ज की, लेकिन बाद में सीट छोड़ दी, जिसके चलते 1996 में उपचुनाव हुआ और उस समय बीजेपी के विजय सिंह यादव विजेता बने। 2000 में लालू यादव ने दोबारा जीत हासिल की, मगर एक बार फिर सीट खाली की, जिससे 2002 में उपचुनाव हुआ और आरजेडी के रामानंद यादव ने जीत दर्ज की।

2005 से 2015 तक किसका रहा राज?

2005 से 2015 तक दानापुर विधानसभा सीट पर बीजेपी की आशा सिन्हा का दबदबा रहा, जिन्होंने लगातार तीन बार जीत दर्ज की। हालांकि, 2020 के चुनाव में आरजेडी के रीतलाल यादव ने उन्हें पराजित कर सीट अपने नाम कर ली। अब एक बार फिर दानापुर में बीजेपी और आरजेडी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। जहां आरजेडी इस सीट को किसी भी कीमत पर बनाए रखना चाहती है, वहीं बीजेपी इसे दोबारा अपने कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। दिलचस्प बात यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भले ही मीसा भारती ने पाटलिपुत्र संसदीय सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन दानापुर विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी को बढ़त मिली थी।

जातीय समीकरण से तय होगी चुनावी नतीजों की दिशा

दानापुर विधानसभा सीट पर इस बार भी जातीय समीकरण ही चुनावी नतीजों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यहां यादव समुदाय के मतदाता लगभग 22%, अनुसूचित जाति (एससी) के 11.88% और मुस्लिम मतदाता करीब 6.5% हैं। वहीं, कुल वोटरों में 66% शहरी और 34% ग्रामीण हैं, जिससे स्पष्ट है कि दोनों वर्गों का झुकाव परिणामों पर निर्णायक असर डाल सकता है। आरजेडी ने इस बार भी मौजूदा विधायक रीतलाल यादव पर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया है, जो वर्तमान में रंगदारी के एक मामले में जेल में बंद हैं। दूसरी ओर, बीजेपी ने रामकृपाल यादव को मैदान में उतारा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि रीतलाल यादव जेल में रहते हुए भी अपनी साख बरकरार रखते हैं या इस बार बीजेपी दानापुर में वापसी करने में सफल होती है।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

और पढ़ें
End of Article