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बंगाल में ‘कमल’ या ‘खेला’? एग्जिट पोल से गरमाई सियासत, बीजेपी उत्साहित, टीएमसी बोली अभी असली गेम बाकी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का महासंग्राम खत्म हो चुका है और अब सबकी निगाहें एग्जिट पोल और नतीजों पर टिकी हैं। ज्यादातर एग्जिट पोल भारतीय जनता पार्टी को बढ़त देते नजर आ रहे हैं, जिससे पार्टी खेमे में उत्साह का माहौल है। वहीं तृणमूल कांग्रेस इन अनुमानों को खारिज करते हुए दावा कर रही है कि अंतिम फैसला उसके पक्ष में ही आएगा।

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चार मई को आएंगे पश्चिम बंगाल के चुनाव के नतीजे।

एग्जिट पोल के नतीजे सामने आते ही बीजेपी दफ्तरों में हलचल तेज हो गई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केवल एग्जिट पोल ही नहीं, बल्कि उनका आंतरिक आकलन भी राज्य में सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है। बीजेपी के मुताबिक, पार्टी 160 से 170 सीटों तक पहुंच सकती है, जो उसे स्पष्ट बहुमत दिलाने के लिए पर्याप्त होगा। रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान को भी बीजेपी अपने पक्ष में मान रही है। पार्टी का दावा है कि आक्रामक चुनाव प्रचार, मजबूत संगठन और सटीक रणनीति के चलते उसे व्यापक समर्थन मिला है। खासतौर पर हिंदू मतदाताओं और मतुआ समुदाय के समर्थन को बीजेपी अपनी संभावित जीत का बड़ा कारण बता रही है।

मुद्दों की लड़ाई: विकास बनाम कल्याणकारी योजनाएं

इस चुनाव में बीजेपी ने क्षेत्रवार रणनीति अपनाई। हुगली और हावड़ा जैसे इलाकों में जूट मिलों की बदहाली, निवेश की कमी और पलायन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। बेरोजगारी, उद्योग और विकास को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर लगातार हमले किए गए। दूसरी ओर, टीएमसी ने महिलाओं, युवाओं और किसानों के लिए अपनी कल्याणकारी योजनाओं को आधार बनाकर चुनाव लड़ा। पार्टी का मानना है कि इन योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक पहुंचा है और यही उसके पक्ष में माहौल बनाएगा।

टीएमसी का पलटवार: “टीवी की हवा अलग, बंगाल की हवा अलग”

एग्जिट पोल के बावजूद टीएमसी पूरी तरह आत्मविश्वास में नजर आ रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बंगाल का मतदाता टीवी स्क्रीन के आधार पर नहीं, बल्कि जमीनी सच्चाई के आधार पर वोट करता है। उनका दावा है कि नतीजे आने पर तस्वीर पूरी तरह अलग होगी और टीएमसी एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी।

नजरें नतीजों पर

फिलहाल राज्य की राजनीति दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ बीजेपी एग्जिट पोल के आधार पर जीत को लेकर आश्वस्त है, तो दूसरी ओर टीएमसी को अपनी जीत पर पूरा भरोसा है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब ईवीएम खुलने के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि बंगाल में “कमल खिलेगा” या “दीदी” एक बार फिर सत्ता पर काबिज होंगी। क्योंकि बंगाल की राजनीति में अंतिम फैसला हमेशा नतीजों के दिन ही सामने आता है।
Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

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