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देवेंद्र फडणवीस, नरेंद्र मोदी, अमित शाह याद रखो तुम तीनों मेरी जुबान... ये क्या बोल गए ओवैसी; देखें VIDEO

Maharashtra: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है। जुबानी जंग तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने फडणवीस, पीएम मोदी और शाह को जमकर कोसा। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस याद रखो तुम मेरी जुबान का मुकाबला नहीं कर सकते।

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ओवैसी ने फडणवीस को सुनाई खूब खरी-खोटी।

Asaduddin Owaisi Slams Devendra Fadnavis: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने देवेंद्र फडणवीस पर जमकर प्रहार किया है। साथ ही उन्होंने पीएम मोदी और अमित शाह पर भी निशाना साधा। ओवैसी ने ‘वोट जिहाद-धर्मयुद्ध’ संबंधी टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर रविवार को निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी का ‘एक हैं तो ‘सेफ’ हैं’ नारा विविधता के लोकाचार के खिलाफ है।

'देवेंद्र फडणवीस याद रखो तुम मेरी जुबान का मुकाबला...'

एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने औरंगाबाद में पार्टी उम्मीदवार इम्तियाज जलील और नासिर सिद्दीकी के समर्थन में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने फडणवीस पर प्रहार करते हुए कहा कि 'महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम इस शहर में आए थे और आकर गैर जरूरी मेरा नाम अपनी जुबान पर लाए। देवेंद्र फडणवीस बोले- सुनो ओवैसी... ए देवेंद्र फडणवीस याद रखो तुम मेरी जुबान का मुकाबला नहीं कर सकते। अगर तुम, मोदी, अमित शाह भी बैठ गए तो मेरी जुबान का मुकाबला नहीं कर सकते।'

'हमारे पूर्वज अंग्रेजों से लड़े थे, आपके पूर्वजों ने प्रेम पत्र लिखे'

ओवैसी ने भाजपा द्वारा श्रद्धेय माने जाने वाले हिंदुत्व विचारकों पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि फडणवीस के (वैचारिक) पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के बजाय उन्हें 'प्रेम पत्र' लिखे थे। फडणवीस ने 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करते हुए शनिवार को कहा था कि 'वोट जिहाद' का जवाब मतों के 'धर्मयुद्ध' से दिया जाना चाहिए।

ओवैसी ने चुनाव में एआईएमआईएम उम्मीदवार इम्तियाज जलील (औरंगाबाद पूर्व) और नासिर सिद्दीकी (औरंगाबाद मध्य) के समर्थन में छत्रपति संभाजीनगर के जिंसी इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, 'हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद किया था और फडणवीस अब हमें जिहाद के बारे में सिखा रहे हैं। नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस मिलकर भी मुझे बहस में नहीं हरा सकते।' ओवैसी ने कहा कि 'धर्मयुद्ध-जिहाद' संबंधी टिप्पणी चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है।

'लोकतंत्र में वोट जिहाद और धर्मयुद्ध कहां से आ गया?'

हैदराबाद के सांसद ने कहा, 'लोकतंत्र में वोट जिहाद और धर्मयुद्ध कहां से आ गया? आपने विधायक खरीदे, क्या हम आपको चोर कहें?' उन्होंने कहा, 'फडणवीस जहां वोट जिहाद की बात करते हैं, वहीं उनके नायक अंग्रेजों को प्रेम पत्र लिख रहे थे, जबकि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने विदेशी शासकों से कोई समझौता नहीं किया।' ओवैसी ने कहा, 'हमने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का तरीका बताया। जब उन्हें (भाजपा को) मालेगांव में (लोकसभा चुनाव के दौरान) वोट नहीं मिले तो उन्होंने (फडणवीस) वोट जिहाद की बात की। जब उन्हें वोट नहीं मिलते, तो वे इसे जिहाद कहते हैं। वे अयोध्या में हार गए। ऐसा कैसे हुआ?'

उन्होंने कहा, 'हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद किया था, आपके नहीं। जिन फडणवीस के पूर्वजों ने अंग्रेजों को प्रेम पत्र लिखे, वह हमें जिहाद सिखाएंगे?' एआईएमआईएम नेता ने कहा कि मोदी कहते हैं ‘एक हैं तो ‘सेफ’ हैं’ क्योंकि वे (भाजपा) इस देश की विविधता को खत्म करना चाहते हैं। ओवैसी ने हिंदूवादी संत रामगिरी महाराज के बयानों पर उठे विवाद का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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