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क्या राहुल गांधी MSP का पूरा मतलब जानते हैं? अमित शाह ने कांग्रेस से पूछे तीखे सवाल

Haryana Election: भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता (LOP) राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस से तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि क्या वह (राहुल गांधी) एमएसपी का पूरा मतलब जानते हैं? शाह ने हरियाणा चुनाव प्रचार के दौरान ये सवाल किया।

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अमित शाह, राहुल गांधी

Amit Shah vs Rahul Gandhi: किसानों के हितों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर शुक्रवार को निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वह एमएसपी का पूरा मतलब भी जानते हैं? साथ ही उन्होंने कहा कि हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 24 फसलें खरीद रही है।

कांग्रेस पर जमकर बरसे अमित शाह

अमित शाह ने रेवाड़ी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए भ्रष्टाचार और आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधा। अमित शाह ने किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ एनजीओ ने राहुल ‘बाबा’ से कहा है कि एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) के नाम पर उन्हें वोट मिलेंगे। उन्होंने पूछा, 'राहुल बाबा आप एमएसपी का पूरा नाम जानते हैं? क्या आप ये भी जानते हैं कि कौन-सी रबी की फसल है और कौन-सी खरीफ की फसल है?'

MSP पर 24 फसलें खरीद रही है सरकार

गृहमंत्री शाह ने कहा कि हरियाणा में भाजपा सरकार एमएसपी पर 24 फसलें खरीद रही है। उन्होंने कहा, 'हरियाणा के कांग्रेस नेता बताएं कि कौन सा कांग्रेस शासित राज्य इतनी फसलें खरीद रहा है।” शाह ने पूछा, 'कर्नाटक और तेलंगाना में एमएसपी पर कितनी फसलें खरीदी जा रही हैं?' उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान धान की खरीद 1300 रुपये प्रति क्विंटल थी लेकिन अब 2300 रुपये प्रति क्विंटल पर धान खरीदा जाता है और अगर आप हरियाणा में भाजपा की सरकार चुनते हैं तो हम 3,100 रुपये (प्रति क्विंटल) पर धान खरीदेंगे।

आठ अक्टूबर को आएंगे चुनावी नतीजे

अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यह नरेंद्र मोदी सरकार है जिसने ‘वन रैंक वन पेंशन’ की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया है। शाह ने कहा कि भाजपा ने हरियाणा में एक समान विकास किया है और पिछले 10 साल में भ्रष्टाचार खत्म हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, 'कांग्रेस की सरकारें कट, कमीशन और भ्रष्टाचार के आधार पर चलती थीं जबकि डीलर, दलाल और दामाद राज करते थे।' हरियाणा में विधानसभा चुनाव पांच अक्टूबर को होंगे और नतीजे आठ अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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