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तो महाराष्ट्र चुनाव के बाद जा सकती है एकनाथ शिंदे की कुर्सी? अमित शाह ने दिए मुख्यमंत्री बदलने के संकेत

Maharashtra Assembly Election: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, अभी एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं। हालांकि, चुनाव में महायुति को बहुमत मिलने के बाद गठबंधन के तीनों साझेदार मुख्यमंत्री पद पर फैसला लेंगे।

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अमित शाह।

Maharashtra Assembly Election: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी राज्य में मुख्यमंत्री बदल सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति पूर्ण बहुमत से सत्ता में लौटेगा और विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन के साझेदार मुख्यमंत्री पद पर फैसला लेंगे। उन्होंने कहा, अभी एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री हैं। चुनाव के बाद गठबंधन के तीनों साझेदार मुख्यमंत्री पद पर फैसला लेंगे।

वहीं, अमित शाह ने शिवसेना और एनसीपी की ओर से अलग-अलग जारी घोषणापत्र पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि महायुति गठबंधन के तीनों साझेदार- भाजपा, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना और उपमुख्यमंत्री अजित पवार नीत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने अपने घोषणपत्र जारी किए हैं। चुनावों के बाद तीनों दलों के मंत्रियों की एक समिति गठित की जाएगी, जो घोषणापत्र में किए गए वादों को प्राथमिकता देने पर फैसला लेगी।

भाजपा परिवार आधारित राजनीति के खिलाफ

इस दौरान अमित शाह ने शरद पवार और उद्धव ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, शिवसेना और राकांपा दो धड़ों में इसलिए बंटी क्योंकि उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे के बजाय अपने बेटे को तरजीह दी और शरद पवार ने अजित पवार के बजाय अपनी बेटी को तरजीह दी। ये दल अपने परिवार के सदस्यों को प्राथमिकता देते हैं और पार्टी बंट जाती है। वे बिना किसी बात के भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा परिवार आधारित राजनीति के खिलाफ है।

मोदी सरकार ने दिया ओबीसी को आरक्षण

अमित शाह ने कांग्रेस के इन आरोपों को भी खारिज किया कि भाजपा आरक्षण को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने ही ओबीसी को आरक्षण दिया। बल्कि हमने आरक्षण मजबूत किया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संविधान की प्रति लहराने की सच्चाई का पर्दाफाश हो गया है क्योंकि उसमें खाली पृष्ठ हैं। भाजपा नेता ने कहा, राहुल गांधी अब मजाक का पात्र बन गए हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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