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लोकसभा में 'साहेब' को खुश किया, विधानसभा में मुझे प्रसन्न करें; अजित पवार ने अजब-गजब अंदाज में किया चुनाव प्रचार

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार ने इशारों-इशारों में अपने चाचा शरद पवार पर तंज कसा है। अजित ने चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से कहा है कि लोकसभा चुनाव में 'साहेब' को खुश किया, अब विधानसभा चुनाव में मुझे प्रसन्न करें।

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शरद पवार और अजित पवार

Ajit Pawar vs Sharad Pawar: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को बारामती के लोगों से राज्य के विधानसभा चुनावों में उन्हें उसी तरह से खुश करने की अपील की, जैसे उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में ‘साहेब’ को किया था। ‘साहेब’ से अजित पवार का इशारा उनके चाचा शरद पवार की तरफ था।

शरद पवार और अजित पवार के बीच जंग जारी है...

लोकसभा चुनाव में राकांपा (शरदचंद्र पवार) नेता और पार्टी प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बारामती में हुए एक ‘हाई-प्रोफाइल’ मुकाबले में अपने चचेरे भाई अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को करारी शिकस्त दी थी। पिछले साल जुलाई में अजित पवार और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कई नेता राज्य में एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल हो गए थे, जिससे शरद पवार द्वारा स्थापित पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी।

अजित पवार का उनके भतीजे युगेंद्र से मुकाबला

राकांपा प्रमुख अजित पवार 20 नवंबर को होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट से किस्मत आजमा रहे हैं। अजित का मुकाबला उनके भतीजे और राकांपा (शरदचंद्र पवार) उम्मीदवार युगेंद्र पवार से है। युगेंद्र ने 28 अक्टूबर को जब इस सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया, तो शरद पवार (83) और सुप्रिया सुले उनके साथ थे।

'अगर सुप्रिया लोकसभा चुनाव हार जातीं, तो साहेब...'

अजित पवार रविवार को बारामती तहसील के कई गांवों के दौरे पर थे, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों से मुलाकात कर कई मुद्दों पर चर्चा की। सांवल गांव में स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए अजित पवार ने कहा, 'अगर सुप्रिया लोकसभा चुनाव हार जातीं, तो साहेब (शरद पवार) को इस उम्र में कैसा महसूस होता, यही सोचकर आपने उन्हें वोट दिया, लेकिन अब विधानसभा चुनाव में मुझे वोट दें।'

उन्होंने कहा, 'आपने लोकसभा चुनाव में ‘साहेब’ को खुश किया, अब विधानसभा चुनाव में मेरे पक्ष में मतदान कर मुझे प्रसन्न करें। ‘साहेब’ अपने तरीके से काम करेंगे, मैं अपने तालुका के विकास के लिए अपनी शैली में काम करूंगा।' एक अन्य गांव के दौरे के दौरान अजित पवार ने दावा किया कि बारामती के लोगों को पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने नियमों से परे जाकर काम किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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