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साइकोलॉजी से कंप्यूटर साइंस और फिर Google तक, जानें कौन हैं इला कृष्ण कुमार

Psychology और Computer Science की पढ़ाई के बाद अगर कोई छात्र MIT में PhD करे और फिर Google में AI की सुरक्षा से जुड़े काम तक पहुंचे, तो यह सफर खास है। Ila Krishna Kumar की कहानी पढ़ाई, रिसर्च और टेक्नोलॉजी को इंसानी जरूरतों से जोड़ने की एक अलग सोच को सामने रखती है।

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साइकोलॉजी से कंप्यूटर साइंस और फिर Google तक, जानें कौन हैं इला कृष्ण कुमार (Image - linkedin.com/in/ilakumar/)

इला कृष्ण कुमार ने साइकोलॉजी और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई से शुरुआत की और आगे चलकर MIT में PhD में एनरोल हुई। जून 2026 से वह Google में Trust & Safety से जुड़े काम में 'स्टूडेंट रिसर्चर' के तौर पर भी काम कर रही हैं। इला कृष्ण कुमार ने यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया से बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री हासिल की। उन्होंने साइकोलॉजी में पढ़ाई की और कंप्यूटर साइंस को माइनर सब्जेक्ट के तौर पर चुना। कॉलेज के दौरान उन्होंने एंजाइटी, डिप्रेशन और साइकोलॉजिकल डेटा से जुड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम किया। इसी दौरान उनके मन में सवाल आया कि क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ अच्छी तरह काम करने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए भी डिजाइन की जा सकती है।

जूनियर प्रोडक्ट मैनेजर के रूप से शुरू किया करियर

पढ़ाई पूरी करने के बाद इला कृष्ण कुमार ने 'कैरेक्टर लैब' में काम किया। यहां उन्होंने जूनियर प्रोडक्ट मैनेजर से शुरुआत की और आगे चलकर UX Strategist और UX Consultant की भूमिका निभाई। उनके काम में छात्रों से जुड़े सामाजिक-भावनात्मक रिसर्च के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना शामिल था।

MIT में शुरू किया रिसर्च का सफर

इला कृष्ण कुमार ने 2021 में MIT ज्वाइन किया। शुरुआत में उन्होंने Affective Computing Group में मास्टर डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने MIT में ही PhD जारी रखने का फैसला किया। उनका रिसर्च ऐसे डिजिटल हस्तक्षेप तैयार करने पर केंद्रित है, जो विकास के दौरान ट्रॉमा का सामना कर चुके युवाओं की मदद कर सकें। इसमें मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी तकनीकों, ट्रॉमा को समझने वाले तरीकों और युवाओं के साथ मिलकर डिजाइन तैयार करने पर जोर दिया जाता है।

युवाओं के साथ मिलकर डिजाइन किए डिजिटल टूल

उनके एक प्रोजेक्ट में ट्रॉमा और चाइल्ड वेलफेयर सिस्टम से जुड़े युवाओं के लिए भावनाओं को व्यक्त करने के नए तरीके तलाशे गए। Stepping Forward LA के साथ मिलकर किए गए इस काम में विजुअल कोलाज सिस्टम पर काम किया गया, ताकि युवा उन भावनाओं को भी व्यक्त कर सकें जिन्हें शब्दों में बताना मुश्किल होता है। एक अन्य प्रोजेक्ट में Justice Resource Institute के साथ मिलकर युवाओं और क्लिनिशियंस के सहयोग से मोबाइल ऐप तैयार करने पर काम किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को अपने ट्रीटमेंट प्लान में अधिक सक्रिय रूप से शामिल करना था।

अब AI और Trust & Safety पर फोकस

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इला कृष्ण कुमार का रिसर्च AI और युवाओं के बीच संबंधों तक भी पहुंच गया है। उनका ध्यान इस बात पर है कि युवा AI टूल्स का इस्तेमाल महत्वपूर्ण फैसलों के लिए किस तरह कर रहे हैं और इस प्रक्रिया में सुरक्षा से जुड़े कौन से सवाल सामने आ सकते हैं।

उनकी कहानी यह दिखाती है कि भविष्य की टेक्नोलॉजी में सिर्फ बेहतर कोड और एल्गोरिदम ही जरूरी नहीं होंगे। यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा कि तकनीक से प्रभावित होने वाले लोगों को उसके निर्माण में कितनी जगह दी जा रही है।

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

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