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कौन है Coempt? जिस कंपनी को मिला CBSE डिजिटल मूल्यांकन प्रोजेक्ट

Who is Coempt The Company Awarded the CBSE Digital Evaluation Project: CBSE का विवाद अब उस कंपनी के चयन और टेंडर प्रक्रिया तक पहुंच गया है जिसने इस साल CBSE का नया On-Screen Marking (OSM) सिस्टम संभाला। CBSE ने इस साल पहली बार बड़े पैमाने पर On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया।

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Coempt eduteck को लेकर क्यों हो रहा बवाल

CBSE का विवाद अब उस कंपनी के चयन और टेंडर प्रक्रिया तक पहुंच गया है जिसने इस साल CBSE का नया On-Screen Marking (OSM) सिस्टम संभाला। CBSE ने इस साल पहली बार बड़े पैमाने पर On-Screen Marking (OSM) सिस्टम लागू किया। इसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल रूप में परीक्षकों को भेजा जाता है और वहीं ऑनलाइन मूल्यांकन होता है। लेकिन रिजल्ट आने के बाद कई समस्याएं सामने आईं : री-इवैल्यूएशन पोर्टल समय पर नहीं खुला। छात्रों और शिक्षकों ने OSM प्लेटफॉर्म में तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत की। कई प्रक्रियाएं प्रभावित हुईं। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया और कंपनी चयन पर सवाल उठने लगे।

अब शिक्षा मंत्रालय ने क्या किया?

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने CBSE से OSM टेंडर प्रक्रिया पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। CBSE ने पहले जो स्पष्टीकरण दिए थे, उनसे मंत्रालय पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। मंत्रालय यह जांच रहा है कि कहीं टेंडर प्रक्रिया में कोई अनियमितता या लापरवाही तो नहीं हुई। साइबर सुरक्षा और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की मजबूती की भी जांच हो रही है। यदि किसी अधिकारी की गलती साबित होती है तो कार्रवाई की जा सकती है। यानी मामला अब केवल तकनीकी गड़बड़ियों का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही तक पहुंच गया है।

टेंडर किसे मिला था?

यह काम हैदराबाद की कंपनी Coempt Edu Teck Pvt Ltd को मिला था। इसने देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) को पीछे छोड़कर यह ठेका हासिल किया।

Coempt और TCS के बीच मुकाबला कैसे हुआ?

टेंडर में दो चरण थे:

1. टेक्निकल स्कोर

Coempt : 91 अंक

TCS : 89 अंक

यानी Coempt सिर्फ 2 अंक से आगे रही।

दोनों कंपनियों को कई तकनीकी मानकों पर लगभग बराबर अंक मिले।

2. सबसे बड़ा अंतर कहां आया?

CBSE के मूल्यांकन के अनुसार Coempt को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और डिजिटल मूल्यांकन के क्षेत्र में अधिक अनुभव माना गया। "Subjective Answer Book Evaluation" अनुभव में Coempt को पूरे अंक मिले। TCS को इस श्रेणी में शून्य अंक मिले। यहीं से Coempt को बढ़त मिल गई। लेकिन TCS तो बहुत बड़ी कंपनी है?

रिपोर्ट के अनुसार: TCS का कारोबार लाखों करोड़ रुपये का है। उसके पास लगभग 5.8 लाख कर्मचारी हैं। Coempt अपेक्षाकृत छोटी कंपनी है। फिर भी टेंडर का फैसला सिर्फ कंपनी के आकार पर नहीं, बल्कि तय तकनीकी मानकों और अनुभव के आधार पर हुआ।

सबसे बड़ा मुद्दा: कीमत

Coempt का रेट

लगभग ₹25 प्रति उत्तर पुस्तिका

TCS का रेट

लगभग ₹53 से ₹65 प्रति उत्तर पुस्तिका

कुल अनुमानित लागत

Coempt : लगभग ₹384.6 करोड़

TCS : लगभग ₹951.3 करोड़

यानी लगभग ₹566 करोड़ का अंतर

इस वजह से वित्तीय मूल्यांकन में Coempt को बहुत बड़ा फायदा मिला।

QCBS क्या होता है?

CBSE ने Quality and Cost Based Selection (QCBS) मॉडल अपनाया था। इसमें 70% महत्व तकनीकी गुणवत्ता को 30% महत्व कीमत को दिया जाता है। ऐसे मॉडल में यदि किसी कंपनी का तकनीकी स्कोर थोड़ा बेहतर हो और उसकी कीमत बहुत कम हो, तो वह अंतिम रैंकिंग में आसानी से आगे निकल सकती है।यही Coempt के साथ हुआ।

विवाद क्यों बढ़ा?

क्योंकि OSM सिस्टम पूरी तरह इसी साल लागू किया गया। बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से शुरू हुई। ठेका 5 दिसंबर को दिया गया था। यानी परीक्षा शुरू होने से सिर्फ लगभग 74 दिन पहले नई व्यवस्था लागू की गई। बाद में तकनीकी समस्याएं और री-इवैल्यूएशन पोर्टल में देरी सामने आई। इसी वजह से अभिभावक, छात्र और शिक्षक सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी प्रणाली को लागू करने के लिए पर्याप्त तैयारी हुई थी या नहीं।

सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष

अभी तक किसी गड़बड़ी या भ्रष्टाचार की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। CBSE का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई।

शिक्षा मंत्रालय फिलहाल टेंडर और OSM सिस्टम की विस्तृत जांच कर रहा है। अगर जांच में कोई प्रक्रिया संबंधी कमी, लापरवाही या अनियमितता मिलती है तो अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

bhawana gupta
भावना किशोर author

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर मूल की भावना ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIMC से 2014 में पत्रकारिता की पढ़ाई की. 12 सालों से मीडिया में काम कर रही हैं. न्यू... और देखें

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