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ULLAS Scheme क्या है? एमपी में स्कूली छात्र बनेंगे लिटरेसी एम्बेसडर, निरक्षर वयस्कों को देंगे शिक्षा

मध्य प्रदेश सरकार ने साक्षरता के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हु ULLAS Scheme के तहत स्कूल के छात्रों को लिटरेसी एम्बेसडर के रूप में अपने आसपास के चार वयस्कों को पढ़ाने के लिए तैयार कर रहा है।

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ULLAS Scheme के तहत एमपी में स्कूली छात्र बनेंगे लिटरेसी एम्बेसडर (Photo - AI)

मध्य प्रदेश सरकार ने साक्षरता (Literacy) के क्षेत्र में एक नई और अनोखी पहल की शुरुआत की है। राज्य सरकार ULLAS योजना के तहत हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के छात्रों को 'लिटरेसी एंबेसडर' के रूप में तैयार कर रही है। इस अभियान के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने आसपास के चार ऐसे वयस्कों को पढ़ाएंगे जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते। छात्र इन शिक्षार्थियों को 'फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी असेसमेंट टेस्ट' (FLNAT) के लिए तैयार करेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस सराहनीय पहल की सराहना की है। लेकिन इस बीच सवाल यह उठता है कि उल्लास योजना क्या है? और लिटरेसी एंबेसडर बनाने से क्या लाभ होगा।

एमपी की ULLAS Scheme क्या है?

'ULLAS - नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' (NILP) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक बहुत महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन वयस्कों को बुनियादी शिक्षा प्रदान करना है, जो किसी कारणवश औपचारिक स्कूली शिक्षा से वंचित रह गए थे। सरकार का मानना है कि हर किसी को शिक्षित होने का अवसर मिलना चाहिए। बता दें कि यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम केवल कागजी पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तहत वयस्कों को दैनिक जीवन में काम आने वाले व्यावहारिक कौशल भी सिखाए जाते हैं।

बुनियादी पढ़ना और लिखना

बुनियादी पढ़ना और लिखना
अंकगणित और वित्तीय साक्षरता (पैसों का हिसाब-किताब)
डिजिटल साक्षरता (स्मार्टफोन और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल)
जीवन जीने के आवश्यक कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण

इस पहल की तत्काल आवश्यकता क्यों है?

2011 की जनगणना के आंकड़ों पर अगर एक नजर डालें तो देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 25.76 करोड़ लोग निरक्षर यानी अशिक्षित थे। विभिन्न साक्षरता अभियानों के माध्यम से करोड़ों लोगों को शिक्षित किया गया, फिर भी देश में आज भी ऐसे करोड़ों वयस्क हैं, जो साक्षरता के बुनियादी अधिकारों से अभी भी दूर हैं। ऐसे में स्कूली छात्रों को इस अभियान से जोड़ना एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।

तकनीक और छात्र शक्ति का संगम

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत इसकी आधुनिक तकनीक और युवा शक्ति का संयोजन है। जी हां, आपने सही समझा, इस योजना के तहत डिजिटल माध्यमों में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई है। आइए आपको इसमें दोनों के लाभों को बारे में बताएं।

डिजिटल लर्निंग हबसीखने की सामग्री 'दीक्षा (DIKSHA) पोर्टल' और 'ULLAS मोबाइल ऐप' पर क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है।
युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्वजब कक्षा 9 से 12 के छात्र अपने से बड़े उम्र के लोगों को पढ़ाते हैं, तो इससे न केवल वयस्कों का जीवन बदलता है, बल्कि छात्रों के भीतर नेतृत्व क्षमता, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का विकास होता है।
प्रमाणपत्र और प्रोत्साहनFLNAT परीक्षा पास करने वाले शिक्षार्थियों और उन्हें पढ़ाने वाले स्वयंसेवक छात्रों दोनों को आधिकारिक प्रमाण पत्र दिए जाते हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ता है।

छात्रों को लिटरेसी एंबेसडर बनाने कोई एक्टिविटी नहीं

मध्य प्रदेश सरकार ने बताया कि ULLAS योजना के तहत छात्रों को 'लिटरेसी एंबेसडर' बनाना केवल एक शैक्षणिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह पीढ़ीगत अंतर को मिटाने और एक समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम है। जब देश की युवा पीढ़ी बुजुर्गों और वयस्कों को ज्ञान का उजियारा बांटेगी, तभी 'पूर्ण साक्षर भारत' का सपना साकार हो सकेगा। यही कारण है कि एमपी में 9वीं से 12वीं के छात्रों को लिटरेसी एंबेसडर बनाकर राज्य की साक्षरता को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाया गया है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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