देश

13 साल से छोटे बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया? दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दिया ये निर्देश

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक या नियम तय करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा है कि यह काम केंद्र सरकार की नीति-निर्माण (पॉलिसी) के दायरे में आता है। अदालत ने इस मामले में खुद कोई सीधा आदेश देने से इनकार करते हुए याचिका को सरकार के पास विचार करने के लिए भेज दिया है।

Image

हाई कोर्ट ने गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाली

Photo : iStock

बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के बढ़ते असर को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को प्रतिबंधित (बैन) करना या उसके लिए नियम बनाना न्यायपालिका का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के नीति-निर्माण (पॉलिसी मेकिंग) का विषय है।

पीटीआई के मुताबिक, न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की पीठ ने इस सार्वजनिक हित याचिका (PIL) पर सीधे निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी मांगों को एक ज्ञापन के रूप में केंद्र सरकार के समक्ष रखें, ताकि संबंधित अधिकारी इस पर विचार कर सकें। अदालत ने सरकार को कोई सख्त समय सीमा देने से भी मना कर दिया और कहा कि ऐसे व्यापक मुद्दों पर सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) की राय लेना और कानून की समीक्षा करना जरूरी होता है।

13 से 16 साल के किशोरों के लिए बनें सख्त नियम

याचिका में मांग की गई थी कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए। इसके अलावा, 13 से 16 साल के किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर मौजूद सामग्री को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त नियम-कायदा तैयार किया जाए। याचिकाकर्ता के वकील ने ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के बढ़ते खतरे पर भी गहरी चिंता जताई।

केंद्र सरकार के वकील ने कोर्ट में क्या कहा?

केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता और सुरक्षा के लिए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून पहले ही लागू किया जा चुका है। सरकार ने माना कि नया कानून या नियम बनाने से देश भर में व्यापक असर पड़ता है, इसलिए इस पर गहराई से विचार आवश्यक है। अदालत ने भी माना कि पूरी तरह बैन लगाना एक अंतिम कदम होता है और तब तक मध्यस्थ कंपनियां आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए जरूरी कदम उठा रही हैं।

monu jha
मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article