एजुकेशन

यूपी पुलिस भर्ती 2018 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 6 हफ्ते में पुनरीक्षित परिणाम जारी करने का आदेश

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Nov 2, 2023, 09:00 AM IST

UP Police Constable Recruitment 2018: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2018 में हुई यूपी पुलिस भर्ती के संबंध में अहम आदेश जारी किया है। हाईकोट ने यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड को 2018 की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पुनरीक्षित परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है।

Image

UP Police Constable Recruitment 2018

UP Police Constable Recruitment 2018: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 2018 में हुई यूपी पुलिस भर्ती के संबंध में अहम आदेश जारी किया है। हाईकोट ने यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड को 2018 की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पुनरीक्षित परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश एक प्रश्न का गलत विकल्प देने के कारण दिया है। बता दें कि प्रश्न पत्र में प्रश्न संख्या 68 का सही विकल्प सी था जबकि उत्तर विकल्प डी दिया गया था। विशेषज्ञ रिपोर्ट में याचियों की आपत्ति सही पाई गई और इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रिवाइज्ड रिजल्ट जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक नोटिस जारी कर सफल अभ्यर्थियों का मेडिकल कराकर चयनित होने पर उन्हें रिक्त रह गए 603 पदों पर नियुक्ति दी जाए। यह कार्यवाही छह सप्ताह में पूरी की जाए।

कोर्ट ने पुलिस भर्ती बोर्ड से पूछा कितने पद रिक्त रह गए हैं तो बताया गया कि 603 पद रिक्त हैं। यह पद अब तक नई भर्ती में कैरी फारवर्ड नहीं हो सके। इसके बाद कोर्ट ने सही जवाब देने वालों को निर्धारित अंक देकर लिखित परीक्षा का पुनरीक्षित परिणाम घोषित करने का आदेश दिया। आदेश में आगे कोर्ट ने कहा है कि याची उम्मीदवार अगर मेडिकल टेस्ट में सफल होते हैं तो, उन्हें रिक्त रह गए पदों पर नियुक्ति दी जाए।

हाईकोर्ट के इस आदेश का लाभ हाईकोर्ट आने वाले अभ्यर्थियों को ही मिलेगा। पहले से चयनित नियुक्त कांस्टेबलों पर इसका असर नहीं पड़ेगा। यह निर्णय न्यायमूर्ति एमके गुप्ता एवं न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने कपिल कुमार व सात अन्य सहित पांच विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याचिका खारिज करने के एकल पीठ के आदेश को रद्द भी कर दिया है।

याची कांस्टेबल भर्ती 2018 में चयनित हुए थे जिसके बाद उनके डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की गई थी। उन्हें शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए भी भेजा गया लेकिन चयन सूची में उनका नाम नहीं आया। सभी याचियों को कट ऑफ अंक के लगभग समान अंक मिले थे। इसके बाद वह कोर्ट चले गए और याचिका डाली। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रश्न संख्या 68 का सही विकल्प सी था जबकि उत्तर विकल्प डी दिया गया था। विशेषज्ञ रिपोर्ट में याचियों की आपत्ति सही पाई गई।

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

और पढ़ें
End of Article