UP Lekhpal Exam 2026: उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के प्रयासों के बीच बीते दिनों आयोजित हुई लेखपाल मुख्य परीक्षा 2025 को लेकर सोशल मीडिया पर पेपर लीक होने दावा किया गया था। लेकिन फैलाई गई पेपर लीक की खबर पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत साबित हुई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) और जिला प्रशासन की त्वरित जांच में साफ हो गया है कि परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित और सीलबंद माहौल में संपन्न हुई। किसी भी तरह से कोई पेपर लीक नहीं हुआ है।
लखनऊ के एक केंद्र से शुरू हुआ पेपर लीक का दावा
परीक्षा के दौरान लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज परीक्षा केंद्र से पेपर लीक होने की कहानी शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि कुछ शरारती तत्वों ने पेपर लीक की अफवाह उड़ाने की कोशिश की। दरअसल, एक कमरे के कुछ अभ्यर्थी किसी कन्फ्यूजन के चलते परीक्षा कक्ष से बाहर आ गए थे। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे 'पेपर लीक' का नाम देकर सनसनी फैलाने का प्रयास किया। हालांकि, अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला, जिसके बाद अभ्यर्थी वापस अपनी सीटों पर लौटे और परीक्षा शांतिपूर्वक पूरी हुई।
जांच में सुरक्षित मिले प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट
पेपर लीक की शिकायत मिलते ही अधिकारियों और निगरानी टीमों तुरंत मामले की गहनता से जांच की। जांच रिपोर्ट में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र और ओएमआर (OMR) शीट के पैकेट पूरी तरह सील बंद थे और सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया गया था।
44 जिलों में लेखपाल भर्ती परीक्षा का शांतिपूर्ण आयोजन
यूपी लेखपाल भर्ती परीक्षा का आयोजन प्रदेश के 44 जिलों में बनाए गए 861 परीक्षा केंद्र में किया गया था। आंकड़ों की बात करें तो परीक्षा के लिए कुल 3,66,712 अभ्यर्थी रजिस्टर किया था, जिनमें से 3,01,756 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। इस परीक्षा में उपस्थिति परीक्षार्थियों का प्रतिशत 82.29 रहा।
योगी सरकार का हाईटेक सुरक्षा मॉडल बना ढाल
नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार बेहद आधुनिक और अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था तैयार की थी। पूरे प्रदेश में 18,883 सीसीटीवी कैमरों के जरिए आयोग मुख्यालय के कमांड रूम से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही थी। केंद्रों पर 7,683 बायोमैट्रिक ऑपरेटर और 6,297 फ्रिस्किंग गार्ड मुस्तैद थे। इतना ही नहीं, परीक्षा नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एआई (AI) का इस्तेमाल भी किया गया था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित पहचान प्रणाली के कारण दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने आए संदिग्धों को पकड़ना आसान हुआ। इसी तकनीक की मदद से बुलंदशहर में एक संदिग्ध अभ्यर्थी को तुरंत पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया था।
