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UP सरकार का बड़ा फैसला! 16 से 20 अप्रैल तक स्कूलों को बनाया जाएगा महिला सशक्तिकरण का केंद्र

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' पर राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगी। sand art, नुक्कड़ नाटक, चित्रकला और लोकगीतों जैसी सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

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उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023' पर राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगी। ये कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान सभी राजनीतिक दलों से इस अधिनियम (महिला आरक्षण अधिनियम) में प्रस्तावित संशोधन का सर्वसम्मति से समर्थन करने का आग्रह करने के एक दिन बाद उठाया गया है।

16 अप्रैल से संशोधन पर चर्चा

संसद 16 अप्रैल से इस संशोधन पर चर्चा शुरू करने वाली है। इस पहल के तहत, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आयोजित होने वाले जागरूकता कार्यक्रमों में छात्र, शिक्षक और आम जनता सक्रिय रूप से शामिल होंगे।

एक प्रेस बयान के अनुसार, 15 और 16 अप्रैल को हर लोकसभा क्षेत्र में 'नारी शक्ति पदयात्राएं' आयोजित की जाएंगी, जिसमें प्रमुख महिलाएं और सामाजिक क्षेत्र के सदस्य भाग लेंगे।

NCC तथा NSS के लोग होंगे शामिल

इन पदयात्राओं में 'लखपति दीदी' जैसी लाभार्थी, सरकारी योजनाओं की महिला लाभार्थी और NCC तथा NSS के स्वयंसेवक शामिल होंगे। अभियान में महिलाओं के नेतृत्व में स्कूटर रैलियां भी शामिल होंगी, ताकि आम जनता तक इसकी पहुंच बढ़ाई जा सके।

बयान में कहा गया है कि यह निर्णय उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की अध्यक्षता में हुई एक वर्चुअल बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें उन्होंने अधिकारियों को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अभियान की गतिविधियों का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

कब तक चलेगा अभियान ?

यह अभियान 20 अप्रैल तक चलेगा। इसके तहत प्रमुख स्थानों, जिनमें महिला कॉलेज और छात्रावास शामिल हैं, पर 'नारी शक्ति दीवारें' (Nari Shakti Walls) भी स्थापित की जाएंगी। इन दीवारों पर महिलाएं अपने विचार व्यक्त कर सकेंगी और महिला सशक्तिकरण के समर्थन में हस्ताक्षर कर सकेंगी। जागरूकता फैलाने के लिए मानव श्रृंखलाएं भी बनाई जाएंगी।

अधिकारियों ने बताया कि जनता की भागीदारी बढ़ाने के लिए रेत कला (sand art), नुक्कड़ नाटक, चित्रकला और लोकगीतों जैसी सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

इसके अलावा मिस्ड कॉल नंबरों और स्टिकरों के माध्यम से भी समर्थन जुटाया जाएगा, जिनका उपयोग अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों में किया जाएगा।

कार्यान्वयन की जिम्मेदारियां विभिन्न अधिकारियों को सौंपी गई हैं: उच्च शिक्षा परिषद के सचिव निजी विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय करेंगे; रजिस्ट्रार सरकारी और सहायता प्राप्त कॉलेजों के साथ समन्वय करेंगे; और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी सभी संस्थानों में कार्यान्वयन सुनिश्चित करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि विशेष सचिव राज्य विश्वविद्यालयों में होने वाली गतिविधियों की देखरेख करेंगे।

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Kusum Bhatt
कुसुम भट्ट author

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बतौर एजुकेशन जर्नलिस्ट कार्यरत कुसुम भट्ट शिक्षा जगत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं। मास्टर्स इन मास कम्... और देखें

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