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Sri Lanka में कहां गिरा था द्रोणागिरी पर्वत का हिस्सा? जानें क्या है उस पहाड़ी का नाम

आप सभी ने रामायण तो सुनी और देखी होगी। इसमें मेघनाद के बाण से घायल लक्ष्मण को बचाने के लिए हनुमान जी पूरा द्रोणागिरी पर्वत उठा लाए थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस दौरान पर्वत का एक हिस्सा Sri Lanka मे गिरा था, जो आज भी वहीं है। आइए जानते हैं उस स्थान का नाम क्या है

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Sri Lanka में कहां गिरा था द्रोणागिरी पर्वत का हिस्सा (Photo - AI)

रामायण की गाथाएं भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास, संस्कृति और आस्था में गहराई से रची-बसी हैं। लंका युद्ध के दौरान जब रावण के पुत्र मेघनाद के बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित (Unconscious) हो गए थे, तब उनके प्राण बचाने के लिए सुषेण वैद्य के बताए अनुसार, भगवान हनुमान हिमालय से संजीवनी बूटी लेने पहुंचे। लेकिन बड़े से पर्वत को देख वह समझ नहीं पाए की इसमें संजीवनी बूटी कौन सी है और आम पौधा कौन सा है। ऐसे में उन्होंने पूरा द्रोणागिरी पर्वत (Dronagiri Parvat) ही उठा लिया और उसे लेकर लंका पहुंचे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रास्ते में द्रोणागिरी पर्वत का एक टुकड़ा टूटकर श्रीलंका की धरती पर गिर गया था। और माना जाता है कि आज भी यह वहीं स्थित है। लेकिन सवाल यह है कि श्रीलंका में वह स्थान आज किस नाम से जाना जाता है और वह पहाड़ी कहां स्थित है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानें।

श्रीलंका में कहां गिरा था द्रोणागिरी का टुकड़ा?

पौराणिक कथाओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बात करें तो द्रोणागिरी पर्वत का टुकड़ा Sri Lanka के दक्षिणी तट पर स्थित रूमास्सला (Rumasalla) नामक एक स्थान पर गिरा था। यह स्थान श्रीलंका के दक्षिणी प्रांत में गाले शहर के निकट, प्रसिद्ध उनावातुना समुद्र तट के पास स्थित है। स्थानीय लोग इस सुरम्य पहाड़ी को 'रूमास्सला हिल' (Rumasalla Hill) के नाम से जानते हैं। इसे लेकर मान्यता है कि द्रोणागिरी पर्वत का एक हिस्सा गिरते ही समुद्र के किनारे एक अलग और अनोखी पहाड़ी के रूप में स्थापित हो गया।

रूमास्सला पहाड़ी की अनूठी विशेषताएं

रूमास्सला पहाड़ी केवल पौराणिक महत्व के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि इसके वैज्ञानिक और प्राकृतिक पहलू भी बेहद खास हैं। आइए इसकी खासियत के बारे में विस्तार से जानें -

अनोखी जड़ी-बूटियां और वनस्पति: इस पहाड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां पाई जाने वाली कई वनस्पतियां और जड़ी-बूटियां आसपास के तटीय इलाकों के पेड़ों से बिल्कुल मेल नहीं खाती हैं। वनस्पतिशास्त्रियों (Botanists) के अनुसार, यहां की कुछ औषधीय प्रजातियां हिमालयी क्षेत्र की वनस्पतियों से काफी मिलती-जुलती हैं, जो पौराणिक कहानी को एक अनोखा आधार प्रदान करती हैं।

स्थानीय मान्यता के अनुसार संजीवनी बूटी: स्थानीय मान्यता के अनुसार, मेघनाद के बाण से घायल हुए लक्ष्मण के प्राण बचाने के हनुमान द्रोणागिरी पर्वत उठा लाए थे, उसी दौरान उनके द्वारा गिराए गए पर्वत के एक टुकड़े के कारण ही इस पहाड़ी पर दुर्लभ औषधीय पौधे उगते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचार में इस्तेमाल करते रहे हैं।

जैविक विविधता का केंद्र: आज रूमास्सला एक संरक्षित अभयारण्य और समृद्ध जैव विविधता (Biodiversity) का केंद्र है, जहां कई प्रकार के दुर्लभ पक्षी, पौधे और जीव पाए जाते हैं।

श्रीलंका में द्रोणागिरी से जुड़े अन्य प्रमुख स्थान

श्रीलंका की लोक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी जब द्रोणागिरी पर्वत लेकर लौट रहे थे, तो केवल रूमास्सला इकलौता स्थान नहीं था, जहां द्रोणागिरी पर्वत के टुकड़े गिरे थे। इसके अलावा भी कुछ अन्य स्थानों पर इस विशाल पर्वत के छोटे-छोटे टुकड़े गिरे थे। जो इस प्रकार है -

रीतिकाल : श्रीलंका के उत्तरी-मध्य प्रांत में स्थित रीतिकाला की पहाड़ियां अपनी दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों के लिए प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि यहाँ भी द्रोणागिरी का एक हिस्सा गिरा था।

हाकागाला : नुवारा एलिया के पास स्थित हाकागाला बॉटनिकल गार्डन भी द्रोणागिरी के अवशेषों में से एक माना जाता है।

थुलहिरिया और कच्छतीवू : इन स्थानों पर भी द्रोणागिरी पर्वत के छोटे अंश गिरने की पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।

आज भी कई पर्यटक इन स्थानों पर संजीवनी बूटे के साक्ष्य देखने के लिए पहुंचते हैं।

सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर के हरि कुमार (K. Hari Kumar) ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में रूमास्सला और वहां पाई जाने वाली संजीवनी बूटे के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि रिसर्चर्स का मानना है कि रूमास्सला पर अनोखी जड़ी-बूटियों के साथ ही चुंबकीय विसंगति (magnetic anomaly) मिली है, जिससे संकेत मिलता है कि यह शायद किसी उल्कापिंड के गिरने का नतीजा भी हो सकता है। हालांकि स्थानीय लोग पूरी तरह से इस बात को मानते हैं कि यह द्रोणागिरी पर्वत का ही हिस्सा है।

Varsha Kushwaha
वर्षा कुशवाहाauthor

वर्षा कुशवाहा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की एजुकेशन डेस्क पर बतौर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं और पिछले 5 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हैं। जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूज रूम में तेजी, सटीकता और गहराई के साथ काम करते हुए अपनी मजबूत संपादकीय पहचान बनाई है। वर्षा की विशेषज्ञता हाइपर-लोकल खबरों, इवेंट कवरेज और स्टेट पॉलिटिक्स से जुड़ी रिपोर्टिंग में भी है। अब तक वर्षा कुशवाहा 8,000 से अधिक खबरें लिख चुकी हैं, जिनमें कई अहम लोकल रिपोर्ट्स, एजुकेशन और करियर की खबरें तथा फीचर-आधारित स्टोरीज शामिल हैं।

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