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POCSO Act: छात्रों को प्रताड़ित करने वाले कर्नाटक के शिक्षक के खिलाफ पॉक्‍सो का मामला, जानें इस एक्ट के बारे में

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 13, 2023, 03:53 PM IST

POCSO Act: कर्नाटक राज्य के एक जिले में छात्रों पर होमवर्क का बोझ डालने और कक्षा में उन्हें प्रताड़ित करने के आरोप में एक शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो का मामला दर्ज किया गया है। शिक्षक के खिलाफ पॉक्‍सो का मामला दर्ज किया गया है, लेकिन हममे से आज भी कई लोग पॉक्‍सो के बारे में नहीं जानते हैं, आईए जानें क्या है पॉक्सो

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कर्नाटक के शिक्षक के खिलाफ पॉक्‍सो का मामला (image - canva)

POCSO Act Kya Hai: शिक्षा जगत में एक हैरान कर देने वाली खबर आई है, जिसके तहत कर्नाटक राज्य के एक शिक्षक खिलाफ पॉक्‍सो का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह शिक्षक छात्रों पर होमवर्क का बोझ डालता था व कक्षा में उन्हें प्रताड़ित भी करता था। इसलिए इस शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो का मामला दर्ज किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं क्या है पॉक्सो, किसे मिल सकता है इसका लाभ? अगर नहीं तो पढ़ें पूरी खबर

सबसे पहले जानें खबर

चिक्कनायकनहल्ली पुलिस के अनुसार, एच.एस. गोडेकेरे सरकारी स्कूल से जुड़े गणित के शिक्षक रवि छात्रों को भारी होमवर्क देते थे। यदि वे काम पूरा करने में असफल रहे, तो वह उन्हें कक्षा में प्रताड़ित करते थे। सजा और यातना सहने में असमर्थ छात्रों ने शिक्षक के बारे में अपने माता-पिता से शिकायत की। उन्होंने उसके दंड और दुर्व्यवहार के डर से स्कूल जाने से भी इनकार कर दिया।

इसके बाद माता-पिता ने चिक्कनायकनहल्ली पुलिस से संपर्क किया, जिसने आरोपी के खिलाफ पॉक्‍सो एक्‍ट के प्रावधान के तहत मामला दर्ज किया। हालांकि मामले की अभी जांच चल रही है, लेकिन हमारे लिए जानना जरूर है कि पॉक्‍सो क्या है?

POCSO Act kya hai - पॉक्सो क्या है

पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट) एक कानून है, पॉक्सो एक्ट का उद्देश्य बच्चों को यौन उत्पीड़न और अश्लीलता से जुड़े अपराधों से बचाना है। पॉक्सो एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को बच्चों की श्रेणी में माना जाता है और यदि 18 से कम उम्र के बच्चों के खिलाफ अपराध होता है, तो पॉक्सो एक्ट के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। सजा इतनी कड़ी है कि इसमें मौत की सजा भी दी जा सकती है, बता दें, पॉक्सो कानून में पहले मौत की सजा नहीं थी, लेकिन 2019 में इसमें बदलाव किया गया और मौत की सजा का भी प्रावधान कर दिया गया।

आईएएनएस इनपुट के साथ
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