NCERT Book Making Process: शिक्षा किसी भी राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला मानी जाती है। कहा जाता है कि शिक्षा नहीं, तो कुछ भी नहीं। और शिक्षा के लिए पाठ्यपुस्तकों (Textbooks) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय स्कूलों में NCERT की किताबें पढ़ी जाती हैं। इन्हें तैयार करना मात्र एक लेखन कार्य नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और गहन शोध आधारित प्रक्रिया है। बच्चों को क्या पढ़ाना है, क्या समझाना है और क्या उनके उम्र के अनुसार सही है, इसे तय करना कोई आसान काम नहीं है। यही वजह है कि इसकी शुरुआत नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) से होती है, जो शिक्षा की दिशा और बच्चों के सीखने के तौर-तरीकों का खाका खींचता है। लेकिन इस बीच आपने कभी सोचा की NCERT की किताबें कैसे तैयार की जाती है। किस आधार पर चैप्टर बनाएं जाते हैं, क्या पढ़ाया जाएगा क्या नहीं यह तय किया जाता है और इसमें बदलाव कैसे होते हैं। तो आइए आज आपको इस सबके बारे में विस्तार के बताएं।
बुक की नींव का निर्धारण कौन करता है?
किसी भी किताब को लिखने की शुरुआत नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) से होती है। यह फ्रेमवर्क तय करता है कि बच्चों को क्या पढ़ाया जाना चाहिए, कंटेंट का तरीका कैसा होगा और पढ़ाई की दिशा क्या रहेगी। जब यह आधार तय हो जाता है, तब हर कक्षा और विषय के लिए अलग-अलग सिलेबस तैयार किया जाता है।
विशेषज्ञ समितियों का गठन
NCERT की किताबों को कोई एक लेखक नहीं लिखता। इसके लिए पाठ्यपुस्तक विकास समितियां (TDCs) बनाई जाती हैं। इन समितियों में निम्नलिखित लोग शामिल होते हैं:
- विश्वविद्यालयों के अनुभवी शिक्षक
- विषय विशेषज्ञ और शिक्षा जगत के जानकार
- पढ़ाने की पद्धति (पेडागॉजी) के विशेषज्ञ
- NCERT के फैकल्टी मेंबर्स और चीफ एडवाइजर
इन समितियों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कंटेंट किसी एक व्यक्ति की राय पर नहीं, बल्कि सामूहिक एकेडमिक समझ और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित हो।
तीन स्तरों पर कंटेंट की जांच
किताब छपने से पहले उसे कड़े परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। तीन स्तरों पर किताब में छपने वाले कंटेंट की जांच की जाती है। जो इस प्रकार है -
1. आंतरिक समीक्षा (Internal Review): NCERT के विशेषज्ञ और संपादक देखते हैं कि कंटेंट बच्चों की उम्र और उनकी कक्षा के स्तर के हिसाब से सही है या नहीं।
2. बाहरी विशेषज्ञ समीक्षा (External Review): बाहर के विद्वान कंटेंट की गुणवत्ता और तथ्यों की मजबूती की जांच करते हैं।
3. संवेदनशीलता जांच (Pedagogy Check): यह देखा जाता है कि कंटेंट सामाजिक और संवैधानिक रूप से कितना सही है। खासकर सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की जांच बहुत बारीकी से की जाती है।
अंतिम मंजूरी और बदलाव की प्रक्रिया
कंटेंट को अंतिम रूप देने के बाद सरकार (शिक्षा मंत्रालय) की ओर से नीतिगत निगरानी रखी जाती है। NCERT एक स्वायत्त संस्था है, लेकिन यह शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है।
क्या छपने के बाद भी बदलाव संभव है?
हां, पाठ्यक्रम तैयार करना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। अगर किताब छपने के बाद भी किसी तथ्य पर गंभीर आपत्ति आती है, तो NCERT विशेष कमेटियां बनाकर उस पर दोबारा विचार करता है। नई शिक्षा नीति (NEP) के आने के बाद सिलेबस को हल्का करने और सुधारने के लिए पहले भी कई बदलाव किए जा चुके हैं।
