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MP Nursing College Scam: नर्सिंग फर्जीवाड़े में 2935 छात्रों को हाईकोर्ट की बड़ी राहत, आगामी परीक्षा में हो सकेंगे शामिल

MP Nursing College Scam: मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में एमपी हाईकोर्ट ने छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने अनुपयुक्त नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े 2,935 छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी है। साथ ही इन छात्रों के लंबे समय से रुके हुए परीक्षा परिणाम जारी किए जाएंगे।

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MP Nursing College Scam: नर्सिंग फर्जीवाड़े में 2935 छात्रों को हाईकोर्ट की बड़ी राहत

MP Nursing College Scam: मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़े मामले में छात्रों को बड़ी राहत मिली है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अनुपयुक्त नर्सिंग कॉलेजों से जुड़े 2,935 छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे (MP Nursing Scam) दी है। कोर्ट ने इन छात्रों के लंबे समय से रुके हुए परीक्षा परिणाम जारी करने का भी निर्देश दिया है। कोर्ट के इस फैसले से उन छात्रों को बड़ी राहत मिली है, जो कॉलेजों की स्थिति और ट्रांसफर प्रक्रिया के कारण अपनी पढ़ाई और परीक्षा को लेकर परेशान थे।

बता दें लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय, जबलपुर के जस्टिस आनंद पाठक एवं जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिविजन बेंच ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए अनुपयुक्त कॉलेजों के जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी पाठ्यक्रम (GNM Course) के 2935 को राहत दी है। मामले में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने नर्सिंग काउंसिल की ओर से हाईकोर्ट में जानकारी पेश कर बताया कि, अनुपयुक्त कॉलेजों से उपयुक्त कॉलेजों में ट्रांसफर हेतु पात्र पाये गए कुल पंजीकृत छात्र 4,475 हैं, जिनमे से शिफ्टिंग हेतु पंजीकृत छात्रों की संख्या 2,813 है और चॉइस फिलिंग करने वाले 2,619 छात्र थे। इसमें 2,395 छात्र सफलतापूर्वक स्थानांतरित किए जा चुके हैं। हाईकोर्ट ने इस जानकारी को रिकार्ड पर लेते हुए सभी छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल करने तथा रुके हुए परीक्षा परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं ।

ग्वालियर-चंबल संभाग के कॉलेजों को हाईकोर्ट से झटका

ग्वालियर और चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों ने हाई कोर्ट में आवेदन देकर राहत की मांग की थी। छात्रों का कहना था कि उनके कॉलेजों की जांच साल 2021 में ग्वालियर बेंच की ओर से बनाई गई 10 सदस्यीय जांच समिति ने की थी। इस जांच में कॉलेजों को उपयुक्त पाया गया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इन कॉलेजों की CBI जांच पर फिलहाल रोक लगाई थी। छात्रों ने कोर्ट से मांग की थी कि जब तक उनके कॉलेजों की जांच पर रोक है, तब तक उन्हें उपयुक्त कॉलेज माना जाए। साथ ही, पिछले साल की तरह इस साल भी उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए और उनके परीक्षा परिणाम जारी किए जाएं।

हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 2021 में जांच करने वाली 10 सदस्यीय समिति ने फैकल्टी की डुप्लीकेसी की जांच नहीं की थी। आरोप है कि ग्वालियर-चंबल संभाग के कई कॉलेजों ने संबंधित सत्रों में फर्जी और डुप्लीकेट फैकल्टी दिखाकर मान्यता हासिल की थी। यह मामला जबलपुर बेंच में चल रहे नर्सिंग फर्जीवाड़े के मामले में भी कोर्ट के सामने रखा गया था। इन दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के इन कॉलेजों को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ वही नर्सिंग कॉलेज संचालन और परीक्षा कराने के योग्य होंगे, जिन्हें जांच के बाद 'सूटेबल' यानी उपयुक्त घोषित किया गया है। हालांकि, कोर्ट ने छात्रों और आवेदनकर्ताओं को यह छूट दी है कि वे चाहें तो इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे प्रकरण में आवेदन दाखिल कर सकते हैं। याचिकाकर्ता एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा ने पक्ष रखा।

क्या है पूरा मामला...

गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका में मध्य प्रदेश में 2020-21 में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी,जिसमें हाईकोर्ट की सख्ती के बाद हुई सीबीआई जांच में लगभग 800 नर्सिंग कॉलेजों में से करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों से भरे पाए गए थे, इन संस्थानों में भवन, लैब, लाइब्रेरी, अनुभवी शिक्षक और 100 बिस्तरों वाले अस्पताल जैसी अनिवार्य सुविधाओं की भारी कमी पायी गई थी । कई कॉलेज केवल कागजों पर चल रहे थे और कई प्रिंसिपल और शिक्षक 15-15 कॉलेजों में एक साथ कार्यरत दर्शाए गए थे । मामले में हाईकोर्ट की सख्ती के चलते नर्सिंग कॉलेजों की संख्या घट कर लगभग 200 रह गई है।

Makarand Kale
मकरंद कालेauthor

सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।\nततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि\n\nसाल 2008 में by chance journalist बना। 2013 से by choice journalist हूं। कहते हैं ना कि अच्छे काम में पहले बहुत परेशानियां आती हैं। और बाद में उसी की आदत पड़ जाती है।

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