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Lohri Essay In Hindi: लोहड़ी पर ऐसे लिखें सबसे सरल व शानदार निबंध, मिलेंगे पूरे मार्क्स

Lohri Essay In Hindi (लोहड़ी पर निबंध हिंदी में): प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया (Lohri Essay In Hindi) जाता है। इस पान पर्व को प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना (Lohri Essay In Hindi 10 Lines) जाता है। इस दिन स्कूल, कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक स्थलों पर कई तरह के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। भाषण व निबंध प्रतियोगिता का आयोजन भी होता है। ऐसे में यहां हम आपके लिए लोहड़ी पर सबसे सरल व शानदार निबंध लेकर आए हैं।

Lohri Essay In Hindi

Lohri Essay In Hindi: यहां देखें लोहड़ी पर सबसे सरल व शानदार निबंध

Lohri Essay In Hindi (लोहड़ी पर निबंध हिंदी में): हर साल लोहड़ी का पर्व मकर संक्रांति से एक दिन पहले 13 जनवरी को मनाया (Lohri Essay In Hindi) जाता है। इसे मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया (Lohri Essay In Hindi 10 Lines) जाता है। यह केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति, कृषि और सामूहिक जीवन से जुड़ा उत्सव है। इस दिन लोग अग्नि प्रज्वलित कर परिवार, पड़ोसी और मित्र एकत्र होकर आग के चारों ओर घूमते हैं। उसमें रेवड़ी, मूंगफली, तिल, गुड़ और पॉपकॉर्न अर्पित करते हैं। यह पावन पर्व सुख समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार की खुशहाली की कामना का प्रतीक है।

इस दिन स्कूल कॉलेज में भी भाषण व निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। ऐसे में यहां हम आपके लिए लोहड़ी पर सबसे सरल व शानदार निबंध लेकर आए हैं। यहां देखें लोहड़ी पर भाषण लेकर आए हैं।

Lohri Essay In Hindi: लोहड़ी पर निबंध

यदि आप भी चाहते हैं कि लोहड़ी पर आपका निबंध पढ़ने वाले की आंखें पन्ने से हटने का नाम ना लें तो अपने निबंध की शुरुआत लोहड़ी पर शानदार कोट्स के साथ करें। साथ ही निबंध लिखते समय भाषा व सेंटेंस फ्रेमिंग का विशेष ध्यान रखें। यहां देखें लोहड़ी पर सबसे सरल व शानदार निबंध

Lohri Essay In Hindi: लोहड़ी पर सबसे सरल व शानदार निबंध

लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रमुख लोकपर्व है, इसे विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में मनाया जाता है। यह पर्व हर वर्ष 13 जनवरी को आता है और शीत ऋतु के अंतिम चरण का संकेत देता है। साथ ही इस पावन पर्व का संबंध कृषि से भी है। इस समय खेतों में रबी की फसल, विशेषकर गेहूं, बढ़वार की अवस्था में होती है। किसान आने वाली अच्छी पैदावार की उम्मीद में इस पर्व को मनाते हैं। इसके अगले दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य के उत्तरायण होने की शुरुआत इसी दिन से होती है। यही कारण है कि लोहड़ी को प्रकाश, ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है। जिसमें सुंदरी एवं मुंदरी की कथा सबसे प्रचलित है।

लोक कथाओं में कहा जाता है कि, किसी समय में सुंदरी एवं मुंदरी नाम की दो अनाथ लड़कियां थीं। इनका एक चाचा था, जिसने इनकी विधिवत शादी कराने की जगह इन्‍हें एक राजा को भेंट देना चाहा। उसी समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक नामी डाकू वहां पहुंचा और सुंदरी एवं मुंदरी को उसके चाचा से छुड़ा कर अपने साथ ले गया। दुल्ला भट्टी ने इन दोनों बहनों की मदद के लिए अच्‍छे लड़के भी तलाशे और एक जंगल में आग जला वहीं पर सुंदरी और मुंदरी का विवाह करवाया दिया। कहा जाता है कि दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया और शगुन के रूप में एक सेर शक्कर ड़ालकर ही उनको विदा कर दिया। इस पर्व को लेकर एक लोककथा यह भी है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है।

यहां आप लोहड़ी पर सबसे सरल व शानदार निबंध पढ़ सकते हैं। साथ ही लोहड़ी क्यों मनाई जाती है यह भी जान सकते हैं।

आदित्य सिंह
आदित्य सिंह author

आदित्य सिंह टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में एजुकेशन सेक्शन पर लिखते हैं। मीडिया में 5 साल का अनुभव रखने वाले आदित्य सिंह स्कूली शिक्षा से लेकर प्र... और देखें

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