Independence Day Speech In Hindi 2024 (स्वतंत्रता दिवस पर भाषण हिंदी में): कुछ नशा तिरंगे की आन का है, कुछ नशा मातृभूमि की शान का है....देशभर में हर तरफ स्वतंत्रता दिवस की तैयारी हो (Independence Day Speech In Hindi) रही है। यही वह दिन है जब भारत करीब 200 साल के अंग्रेजी हुकूमत के बाद आजाद हुआ था। देश को आजाद करवाने के लिए ना जाने कितने स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की (Independence Day Speech) आहुति दी। इस दिन को भारतवर्ष में बड़े धूमधाम के साथ मनाया (Independence Day Speech For Students) जाता है। स्कूल कॉलेज व अन्य शैक्षणिक संस्थानों व सामाजिक स्थलों में तरह तरह के देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए (Independence Day Speech For Kids) जाते हैं। साथ ही इस दिन के महत्व व इतिहास का जिक्र करने के लिए भाषण प्रतियोगित का जिक्र किया जाता है। ऐसे में यहां हम आपके लिए देशभक्ति कविताएं लेकर आए हैं। इस कविता के साथ आप भाषण की शुरुआत कर सभागार में बैठे लोगों का दिल जी सकते हैं। यकीन मानिए आपका भाषण सुनने के बाद पूरा स्टेडियम भारत माता के जयकारों से गूंज उठेगा।
Independence Day Speech In Hindi: इस कविता से करें भाषण की शुरुआत
यदि आप चाहते हैं कि स्वतंत्रता दिवस पर आपके भाषण के बाद आपका चेहरा लोगों के दिलों में छप जाए तो मंच पर पहुंचते ही माइक हांथ में लेते ही देशभक्ति कविता के साथ अपने भाषण की शुरुआत। इस दौरान आपके चेहरे पर एक अलग ही तेज व जोश होना चाहिए।Independence Day Poem In Hindi
- उठो, धरा के अमर सपूतों।पुन: नया निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में
फिर से नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नई प्रात है नई बात है
नई किरन है, ज्योति नई।
नई उमंगें, नई तरंगें
नई आस है, सांस नई।
युग-युग के मुरझे सुमनों में
नई-नई मुस्कान भरो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।
Independence Day Poem In Hindi
- हम बच्चे हंसते गाते हैं। हम आगे बढ़ते जाते हैं।पथ पर बिखरे कंकड़ कांटे, हम चुन चुन दूर हटाते हैं।
आयें कितनी भी बाधाएँ, हम कभी नही घबराते हैं।
धन दौलत से ऊपर उठ कर, सपनों के महल बनाते हैं।
हम खुशी बांटते दुनिया को, हम हँसते और हँसाते हैं।
सारे जग में सबसे अच्छे, हम भारतीय कहलाते हैं।
Heart Touching Speech On Independence Day
- तेरी मिट्टी में मिल जावांतलवारों पे सर वार दिए
अंगारों में जिस्म जलाया है
तब जाके कहीं हमने सर पे
ये केसरी रंग सजाया है...
ए मेरी ज़मीं अफसोस नहीं
जो तेरे लिए सौ दर्द सहे
मेहफूज रहे तेरी आन सदा
चाहे जान मेरी ये रहे ना रहे...
ऐ मेरी ज़मीं महबूब मेरी
मेरी नस-नस में तेरा इश्क बहे
फीका ना पड़े कभी रंग तेरा
जिस्मों से निकल के खून कहे
तेरी मिट्टी में मिल जावां
गुल बनके मैं खिल जावां
इतनी सी है दिल की आरजू..
तेरी नदियों में बेह जावां
तेरे खेतों में लेहरावां
इतनी सी है दिल की आरजू....
सरसों से भरे खलिहान मेरे
जहाँ झूम के भंगड़ा पा न सका
आबाद रहे वो गाँव मेरा
जहाँ लौट के बापस जा न सका
ओ वतना वे, मेरे वतना वे
तेरा मेरा प्यार निराला था
कुर्बान हुआ तेरी अस्मत पे
मैं कितना नसीबों वाला था
तेरी मिट्टी में मिल जावां
गुल बनके मैं खिल जावां
इतनी सी है दिल की आरजू
