भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना की स्थापना संसद के अधिनियम द्वारा 6 अगस्त 2008 में की गई थी। इस संस्थान की स्थापना के साथ ही देश में इंजीनियरिंग कोर्स की सीटों में वृद्धि हुई थी, जिससे इंजीनियर बनने वाले कई छात्रों के सपनों को उड़ान मिली थी। बिहार की राजधानी में स्थित आईआईटी पटना करीब 500 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ एक खुबसूरत संस्थान है।
अन्य आईआईटी संस्थानों के जैसे ही आईआईटी पटना भी कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में बेस्ट माना जाता है। इसके साथ अब यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा साइंस में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आईआईटी पटना को NIRF रैंकिंग 2025 में 19वां स्थान प्राप्त है, जबकि समग्र यानी ओवरऑल श्रेणी में 36वां स्थान मिला है।
आईआईटी पटना में एडमिशन की क्लोजिंग रैंक सामान्य वर्ग के उम्मीदवार के लिए 3,300 रही है। जबकि इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स में 6,900 और मकैनिकल इंजीनियरिंग में 10,800। जबकि सिविल इंजीनियरिंग में 13,600 कट-ऑफ रही है। बता दें कि कोर्स के अनुसार, यहां कट-ऑफ जारी की जाती है।
आईआईटी पटना में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग ब्रांच में कुल 86 सीटें उपलब्ध हैं। जोसा काउंसलिंग के माध्यम से सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया पूरी की जाती है।
आईआईटी पटना में प्रवेश के लिए यदि उम्मीदवारों की जेईई एडवांस में रैंक अच्छी भी लेकिन 12वीं कक्षा में उनके अंक कम है तो उन्हें एडमिशन लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। बता दें कि आईआईटी संस्थानों में प्रवेश के लिए 12वीं कक्षा के उम्मीदवार को कम से कम 75 प्रतिशत अंकों की आवश्यकता है। यदि उनके अंक इससे कम होते हैं, लेकिन वह टॉप 20 परसेंटाइल में शामिल है तो वह एडमिशन के पात्र माने जाएंगे। यह सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए है। आरक्षित श्रेणी यानी एससी और एसटी के लिए न्यूनतम अंक 65 प्रतिशत है।