टाइगर देखने की इच्छा है तो अक्टूबर में रणथंभौर नेशनल पार्क जाने का प्लान बनाएं। मानसून के बाद यहां सफारी का मुख्य सीजन शुरू हो जाता है। जंगल की हरियाली, प्राचीन रणथंभौर किला और खुले मैदान इसकी खूबसूरती बढ़ा देते हैं। पार्क अक्टूबर से जून के बीच पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
घने साल के जंगल और दूर तक फैले घास के मैदान कान्हा को बेहद खूबसूरत बनाते हैं। यहां बाघ के साथ दुर्लभ बारहसिंगा देखने का मौका भी मिल सकता है। यहां अक्टूबर से सफारी सीजन शुरू होता है।
बांधवगढ़ देश के सबसे चर्चित टाइगर रिजर्व में शामिल है। यहां जंगल के बीच स्थित प्राचीन बांधवगढ़ किला नजारे को और दिलचस्प बना देता है। ताला, मगधी और खितौली यहां के प्रमुख सफारी जोन हैं। सीमित सीटें होने के कारण परमिट की बुकिंग पहले करना बेहतर रहेगा।
बच्चों के साथ यहां अच्छी सफारी एंजॉय कर सकते हैं। सागौन के जंगल, खुली घासभूमि और पेंच नदी यहां के मुख्य आकर्षण हैं। यहां बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, हिरण और कई प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं।
केन नदी इस टाइगर रिजर्व की खूबसूरती बढ़ाती है। यहां बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और कई दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं। सफारी के साथ केन घड़ियाल अभयारण्य और पांडव फॉल्स भी देख सकते हैं। खजुराहो से नजदीक होने के कारण दोनों जगहों को एक ही यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
महाराष्ट्र का ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व बाघों के अच्छे ठिकानों में गिना जाता है। यहां बांस के जंगल, झीलें और घास के मैदान वन्यजीवों को देखने के कई अवसर देते हैं। मानसून के बाद अक्टूबर से मुख्य पर्यटन सीजन शुरू होता है। लोकप्रिय गेट के सफारी परमिट जल्दी भरते हैं, इसलिए एडवांस बुकिंग करें।
दिल्ली-NCR से वीकेंड जंगल सफारी के लिए जिम कॉर्बेट सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक है। इसके अलग-अलग पर्यटन जोन अलग तारीखों पर खुलते हैं। झिरना और ढेला जोन पूरे साल खुले रहते हैं, जबकि बिजरानी जोन 15 अक्टूबर तथा ढिकाला और दुर्गादेवी जोन 15 नवंबर से खुलते हैं।