पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एमबीबीएस परीक्षा में धांधली के आरोप सामने आने के बाद बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। संस्थान ने एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की पूरक परीक्षा को रद्द कर दिया है, जिससे मेडिकल शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। परीक्षा रद्द होने से प्रभावित छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, इस परीक्षा में कुल 130 छात्र शामिल हुए थे।
यह मामला न सिर्फ एक संस्थान तक सीमित है, बल्कि देश में मेडिकल परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। फिलहाल, जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एमबीबीएस की यह पूरक परीक्षा दिसंबर 2025 में आयोजित हुई थी, जिसमें करीब 130 छात्र शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद एक अज्ञात ईमेल के जरिए गड़बड़ी की शिकायत सामने आई, जिसके बाद संस्थान प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी। इस पूरे प्रकरण ने मेडिकल शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी एक गुमनाम शिकायत में पेपर लीक और उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर के आरोप लगाए गए थे, जिसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू हुई थी।
जांच रिपोर्ट के आधार पर संस्थान ने सख्त कार्रवाई करते हुए परीक्षा विभाग के सभी कर्मचारियों और सात छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन छात्रों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। साथ ही परीक्षा विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए कई अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदली गई हैं। बता दें कि जांच में यह संकेत मिले हैं कि उत्तर पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों में छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है। खासतौर पर कुछ कॉपियों में हस्ताक्षरों में असमानता पाई गई, जिससे संदेह और गहरा हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों का तत्काल तबादला भी कर दिया गया है। इसके अलावा तीन वरिष्ठ डॉक्टरों प्रो. अंजू सिंह, डॉ. विनोद कुमार और डॉ. सरिता मिश्रा को सब डीन (परीक्षा) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, ताकि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा सके।
