IIT Bombay AI Firm: Apple के सीईओ टिम कुक हों या फिर टेस्ला, स्पेसएक्स और X जैसे प्लेटफॉर्म और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क हों, जब भी कोई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत या फिर इसके परिणामों पर बात करता है तो इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिलता है। मिले भी कैसे ना, आज के समय में हर इंडस्ट्री में AI स्किल्स की मांग और जरूरतें बढ़ती ही जा रही हैं। साथ ही युवाओं को AI के बढ़ते प्रयोग से नौकरी जाने का खतरा सता रहा है वो अलग। मगर अब भारत में भी AI जिस कदर हर सेक्टर में तेजी से पैर पसार रहा है, उसे देखते हुए IIT Bombay ने देश की पहला एआई कंपनी खड़ी करके इतिहास रच दिया है। इस लेख में चलिये बात करते हैं भारत के इस पहले एआई मॉडल की जरूरत, काम करने का तरीका, मकसद और इसकी भविष्य की संभावनाओं के बारे में... साथ ही बात करेंगे इस बारे में कि ये एआई कंपनी या इसके काम करने का तरीका भारत में बहुतायत में इस्तेमाल होने वाले अन्य AI प्लेटफॉर्म जैसे कि Chatgpt, Google Gemini से कैसे अलग है।
IIT बॉम्बे की खुद की AI कंपनी
IIT बॉम्बे को AI की बढ़ती जरूरत और आने वाले समय की क्रांति का अंदाजा हो चुका है और यही वजह है कि छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए इंस्टीट्यूट ने इतना बड़ा कदम उठाते हुए अपनी ही खुद की AI कंपनी बना ली है। 7 नवंबर 2025 को BharatGen Technology Foundation नाम की इस कंपनी को मुंबई के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में रजिस्टर किया गया। खास बात तो ये है कि कंपनी का पता भी IIT बॉम्बे ही है। मतलब ये कि ये किसी तरह का स्टार्टअप या फिर स्पिन ऑफ नहीं, बल्कि पूरी तरह से IIT बॉम्बे की अपनी ही कंपनी है।
सरकार की बड़ी AI मुहिम के तहत चल रहे BharatGen प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भी इसी कंपनी के पास होगी। ये भारत की एक ऐसी पहली कोशिश है, जिसमें अलग-अलग भाषाओं, बोलियों और देश की सांस्कृतिक विविधता के आधार पर एक बड़ा यानी Large Language Model (LLM) को तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट की नींव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने रखी थी, जिसने शुरुआती सेटअप के लिए 235 करोड़ रुपये की भारी भरकम फंडिंग भी दी है।

BharatGen
Note: DST भारत सरकार का एक बहुत बड़ा विभाग है, जो देश में विज्ञान तकनीक और रिसर्च को बढ़ावा देता है। ये नई टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्ट और इनोवेशन को फंडिंग देने का भी काम करता है।
क्यों भारत को AI कंपनी की है जरूरत ?
अब सवाल ये कि जब पहले ही एआई मॉडल हैं और भारत में इनका अच्छी तरह इस्तेमाल हो भी रहा है तो फिर इस स्वदेशी मॉडल की जरूरत क्यों पड़ी ? तो इस बारे में आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन बताते हैं कि लैब में बने एआई मॉडल को बाजार तक पहुंचाना हो तो उसके लिए कंपनी का ढांचा जरूरी है। एक प्रोजेक्ट के तौर पर ये संभव नहीं था। इसी वजह से BharatGen को स्थापित किया गया। ताकि फैसले लेने, निवेश और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को सुचारू ढंग से किया जा सके। साथ ही भारत की AI की निर्भरता को खत्म करने के लिए भी ये फैसला लिया गया है।

BharatGen
विदेशी AI में क्या चुनौतियां ?
एक बड़ी चुनौती ये भी थी कि अभी तक हम दूसरे देशों के AI को इस्तेमाल कर रहे हैं और ये हमारे देश की बोली, भाषा और तरीके के साथ-साथ डेटा को अच्छी तरह से नहीं समझ पाती है। कई बार डेटा में गड़बड़ी भी देखने को मिली है। Google Gemini, OpenAI और Chatgpt जैसे AI मॉडल अंग्रेजी भाषा या फिर किसी अन्य विदेशी भाषा पर अच्छी तरह से ट्रेन्ड होती हैं। अगर भारत की अपनी AI कंपनी होगी तो इसे यहां की 22 भाषाओं पर अच्छी तरह से ट्रेन्ड किया जाएगा। साथ ही यहां का डेटा भी इसमें अच्छी तरह फीड किया जाएगा।
IIT बॉम्बे के साथ मिलकर काम कर रहे ये संस्थान
BharatGen Consortium में IIT बॉम्बे के साथ IIT मद्रास, IIT कानपुर, IIT हैदराबाद, IIT इंदौर, IIT खड़गपुर और IIIT दिल्ली जैसे कई बड़े संस्थान भी शामिल हैं। सभी मिलाकर एक ऐसा भारतीय AI मॉडल तैयार कर रहे हैं जो 22 से भी ज्यादा भाषाएं बोल सके, समझ सके और इन्हीं भाषाओं में जवाब भी दे सके।

BharatGen
आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन का कहना है कि भारत को असली फायदा तभी मिलेगा, जब एआई मॉडल को इंडस्ट्री की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाए। सिर्फ अकैडमिक रिसर्च के लिए ही नहीं। इसी सोच के साथ अब BharatGen टीम अपने इस AI मॉडल को ट्रेन कर रही है। खासकर भारतीय भाषाओं, दस्तावेजों, राजनीतिक-सामाजिक संदर्भों और देश के असली और सही डेटा पर।
आईआईटी बॉम्बे का ये कदम साफ दिखाता है कि आने वाले समय में भारत अपनी खुद की AI टेक्नोलॉजी बनाएगा, दिखाएगा, समझेगा और खुद इस्तेमाल भी करेगा। इस दिशा में आईआईटी बॉम्बे का ये कदम काफी बड़ा और अहम माना जा रहा है। इस मॉडल के आने के बाद भारत AI के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बन जाएगा।
