DM and Judge Powers : डीएम बनने का सपना लाखों युवा देखते हैं। इसके लिए देश की सबसे मुश्किल परीक्षा UPSC पास करनी होती है। फिर जाके ट्रेनिंग के बाद डीएम बना जाता है। जज की बात करें तो ये कानून में इस पद का ओहदा बहुत ऊपर होता है। जज बनना अपने आप में बहुत बड़ी बात मानी जाती है। लाखों स्टूडेंट्स हर साल इसके लिए पेपर देते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि दोनों में से कौन ज्यादा पावरफुल होता है? दोनों में से किसके पास ज्यादा शक्तियां होती हैं?
दोनों के पास अलग-अलग शक्तियां IAS and JUDGE Powers
अगर बात करें डिस्ट्रिक्ट जज और डीएम की तो दोनों ही एक जिले से जुड़े हुए होते हैं। दोनों के पास अपने काम और अपनी अपनी शक्तियां होती हैं।मगर इनकी जिम्मेदारियां बेहद अलग होती हैं। दोनों ही जिले के प्रमुख पदों पर विराजमान होते हैं। सबसे पहले बात अगर डीएम की करें तो ये पूरे जिले का प्रशासनिक अधिकारी होता है। DM को पूरे जिले का मुखिया भी कहा जा सकता है। जिला न्यायाधीश पूरे जिले का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी होती है। ये जिला अदालत में सिविल और क्रिमिनल मामलों की सुनवाई करता है।
कौन ज्यादा पावरफुल? IAS and Judge Power Difference
अब बात अगर इनकी शक्तियों की की जाए तो कानूनी मामलों में डिस्ट्रिक्ट जज ज्यादा शक्तिशाली होता है। जज का जिले की सभी निचली अदालतों पर प्रशासनिक कंट्रोल होता है। वे जिले के सभी आपराधिक और दीवानी मामलों की देखरेख करते हैं। वे जिला अधिकारी से स्वतंत्र होकर काम करते हैं। यहां तक कि वे कई मामलों में तो सरकारी अधिकारियों को भी निर्देश दे सकते हैं।
जान लें ये जरूरी बात
वहीं बात डीएम की करें तो प्रशासनिक मामलों में डीएम ज्यादा शक्तिशाली होता है। आईएएस ऑफिसर्स का काम नीतियों को लागू करना और प्रशासन को संभालना होता है। आईएएस अधिकारी की शक्ति नीतियों को लागू करने और प्रशासन को चलाने में है। कानून की नजर से देखा जाए तो जज की पावर थोड़ी ज्यादा है, क्योंकि आदेश के बाद प्रशासन को भी जज के फैसले पर चलना पड़ता है। हालांकि दोनों के अपने अलग-अलग काम और जिम्मेदारियां हैं। जैसा कि हमने ऊपर बताया है, आईएएस अधिकारी से स्वतंत्र होकर ही जज काम करते हैं।
