उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में मंदिर निर्माण के लिए प्रस्तावित 'कारसेवा' और 'शंखनाद' कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। गोवर्धन क्षेत्र में किसी भी नई धार्मिक परंपरा की शुरुआत और बिना अनुमति वाले आयोजनों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कदम सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा विवादित स्थल से जुड़े मामलों में दिए गए दिशा-निर्देशों के तहत उठाया गया है।
नई परंपराओं पर पूर्ण प्रतिबंध, पुलिस की सख्त चेतावनी
अपर पुलिस अधीक्षक (शहर) राजीव कुमार सिंह ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए जिले में किसी भी तरह की नई परंपरा शुरू करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि कुछ आयोजकों ने 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण के लिए 'कारसेवा' का ऐलान किया था और प्रमुख संतों व प्रबुद्ध नागरिकों से 'शंखनाद' कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की थी। यह आह्वान बिना किसी पुलिस अनुमति के किया गया था। राजीव कुमार सिंह ने कहा कि हम क्षेत्र की ओर आने वाले सभी लोगों को रोक रहे हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक उनके संबंधित थाना क्षेत्रों में वापस भेजा जा रहा है। संबंधित पक्षों को अदालत के आदेशों से अवगत कराया गया है और उन्होंने इसका पालन करने का आश्वासन दिया है। वर्तमान में क्षेत्र में शांति व्यवस्था पूरी तरह कायम है और सभी पक्षों से बातचीत जारी है।
साध्वी ऋतंभरा और देवकीनंदन ठाकुर समेत 12 संतों को नोटिस
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाते हुए उन संगठनों और प्रमुख धार्मिक हस्तियों को "रेड कार्ड" कानूनी नोटिस थमाए हैं, जिनसे इस कार्यक्रम के सिलसिले में संपर्क किया गया था या जिन्हें आमंत्रित किया गया था।
जिन्हें नोटिस जारी किया गया है, उनमें साध्वी ऋतंभरा, कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर, महंत फूलडोल बिहारीदास, श्रीचरणदास, सौरभ गौड़, सीताराम दास, अभिषेक ब्रह्मचारी, मोहिनी बिहारी शरण, महामंडलेश्वर कृष्णानंद शामिल हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इन सभी धर्मगुरुओं को अदालती आदेशों के पालन की हिदायत दी गई है और सभी ने प्रशासन को सहयोग का भरोसा दिया है।
गौरतलब है कि गोवर्धन क्षेत्र में राधाकुंड के पास जुलहैंडी गांव स्थित श्री चित्रगुप्त पीठ के अध्यक्ष स्वामी डॉ. सच्चिदानंद ने 4 जुलाई को घोषणा की थी कि 9 अगस्त को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर 'कारसेवा' की जाएगी। उन्होंने सनातन परंपरा के अनुयायियों और संतों से बड़ी संख्या में मथुरा पहुंचने की अपील की थी।
