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Delhi Private School Fees News: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्राइवेट स्कूल बढ़ा सकते हैं फीस

Delhi Private School Fees News: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय (DoE) को बड़ा झटका देते हुए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली के प्राइवेट स्कूल और बिना सरकारी सहायता वाले मान्यता प्राप्त स्कूलों को नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने पर फीस बढ़ाने के लिए शिक्षा निदेशालय से पहले से अनुमति या मंजूरी लेने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है। हालांकि यदि स्कूल शैक्षणिक सत्र के बीच फीस बढ़ाते हैं तो इसके लिए मंजूरी जरूरी होगी। साथ ही स्कूल पुराना बकाया फीस नहीं वसूल सकते हैं।

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Delhi Private School Fees News: दिल्ली के प्राइवेट स्कूल बढ़ा सकते हैं फीस

Delhi Private School Fees News: दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त स्कूलों की फीस बढ़ोतरी को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि कोई निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे इसके लिए शिक्षा निदेशालय से पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि कोई स्कूल चल रहे शैक्षणिक सत्र के बीच फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसके लिए शिक्षा निदेशालय की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी।

Delhi Private School Fees Latest News: अपने आदेश में क्या कहा हाईकोर्ट ने?

जस्टिस अनूप जयराम भंबानी की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम की धारा 17(3) के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की केवल यह जिम्मेदारी है कि वे नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अपनी प्रस्तावित फीस संरचना का विवरण DoE के पास जमा करें। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि फीस बढ़ाने के लिए किसी प्रकार की पूर्व स्वीकृति या अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

Delhi Private School Fees Hike Latest News: किन याचिकाओं पर आया फैसला?

यह फैसला DPS वसंतकुंज समेत कई निजी स्कूलों द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है। स्कूलों ने शिक्षा निदेशालय के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें विभाग ने फीस वृद्धि के प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।

Delhi Private School Fee News: शिक्षा निदेशालय की भूमिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने शिक्षा निदेशालय की कार्यप्रणाली पर भी तीखी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि विभाग कानून और न्यायिक आदेशों की अनदेखी करते हुए अस्पष्ट तरीके से कार्रवाई करता रहा है।

कोर्ट ने कहा कि DoE की भूमिका केवल नियामक है। विभाग सिर्फ यह सुनिश्चित कर सकता है कि स्कूल शिक्षा का व्यवसायीकरण न करें, मुनाफाखोरी में शामिल न हों, कैपिटेशन फीस न वसूलें। अदालत ने साफ कहा कि DoE स्कूलों के वित्तीय मामलों का “माइक्रो मैनेजमेंट” नहीं कर सकता।

उचित मुनाफा रखना मुनाफाखोरी नहीं है

कोर्ट ने माना कि स्कूलों को अपने विकास और विस्तार के लिए उचित सरप्लस रखने का अधिकार है। अदालत ने कहा कि किसी स्कूल के पास अधिक अधिशेष राशि होना अपने-आप में मुनाफाखोरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ऐसा निष्कर्ष केवल विस्तृत वित्तीय ऑडिट के बाद ही निकाला जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में शिक्षा निदेशालय ने बिना किसी ठोस निष्कर्ष के स्कूलों पर मुनाफाखोरी के आरोप लगाए। अदालत ने ऐसी टिप्पणियों बिना वजह की बयानबाजी बताया।

डेवलपमेंट फंड पर भी टिप्पणी

स्कूलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि डेवलपमेंट फंड छात्रों से स्कूल के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लिया जाता है और इसका इस्तेमाल सामान्य खर्चों में नहीं किया जा सकता।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि लैंड क्लॉज केवल एक कॉन्ट्रैक्ट्सल शर्त है और इससे शिक्षा निदेशालय की वैधानिक शक्तियों का विस्तार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अभिभावकों को दी राहत

हाईकोर्ट ने अभिभावकों को राहत देते हुए कहा कि स्कूल पुराने शैक्षणिक सत्रों की बकाया फीस नहीं वसूल सकते। कोर्ट ने कहा कि कई फीस प्रस्ताव 2016-17 से लंबित पड़े थे और अब पिछली अवधि की फीस वसूलना अभिभावकों पर अनुचित बोझ होगा।

अदालत ने निर्देश दिया कि स्कूलों द्वारा प्रस्तावित अंतिम फीस वृद्धि अप्रैल 2027 से शुरू होने वाले अगले शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। साथ ही किसी भी स्कूल को पिछली अवधि की फीस का बकाया वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तव author

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुना... और देखें

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