देश में होने वाली प्रतियोगी और सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और दूसरे संबंधित लोगों से सुझाव मांगे हैं। इसके लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में High-Powered Task Force (HPTF) का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, प्रश्नपत्र और मूल्यांकन व्यवस्था, तकनीक, परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की समीक्षा कर रही है। इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षाएं भी शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है जो सुरक्षित होने के साथ-साथ पारदर्शी और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर देने वाली हो। टास्क फोर्स परीक्षा के मौजूदा सिस्टम में मौजूद कमियों की पहचान करके उन्हें दूर करने के उपाय सुझाएगी। परीक्षाओं में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, सुरक्षित कंप्यूटर आधारित टेस्टिंग और परीक्षा से जुड़ी संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों की संख्या और सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर भी सुझाव लिए जा रहे हैं।
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कौन-कौन दे सकता है सुझाव?
सरकार ने सुझाव देने की प्रक्रिया को केवल छात्रों तक सीमित नहीं रखा है। परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थी और अभ्यर्थी, माता-पिता, शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान अपनी राय दे सकते हैं। इसके अलावा परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाएं, परीक्षा के लिए उम्मीदवार उपलब्ध कराने वाले संगठन, विषय विशेषज्ञ, टेक्नोलॉजी से जुड़े पेशेवर, उद्योग संगठन और सिविल सोसाइटी संस्थाएं भी सुझाव भेज सकती हैं।
पेपर लीक और नकल रोकने पर भी मांगी राय
सुझावों में परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के तरीके भी शामिल किए जा सकते हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि पेपर लीक, नकल और दूसरी परीक्षा संबंधी अनियमितताओं को कैसे रोका जाए और अगर कोई गड़बड़ी सामने आती है तो उस पर तेजी से कार्रवाई कैसे हो।
इसके साथ परीक्षा की सुरक्षा और प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा के आयोजन तक पूरी प्रक्रिया को ज्यादा मजबूत बनाने पर भी सुझाव लिए जाएंगे।
छात्रों की मानसिक परेशानी पर भी रहेगा ध्यान
नई परीक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों के हित और उनकी मानसिक स्थिति को ध्यान रखा जाएगा। परीक्षा के दौरान छात्रों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने, सही जानकारी समय पर पहुंचाने और शिकायतों का समाधान करने की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी सुझाव मांगे गए हैं। परीक्षा से जुड़े बदलावों और जरूरी सूचनाओं को उम्मीदवारों तक स्पष्ट तरीके से पहुंचाने के लिए बेहतर communication system बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।
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