CBSE OSM Controversy : CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग पोर्टल को लेकर शुरू हुआ विवाद सिर्फ तकनीकी खामियों तक ही सीमित नहीं रहा। बल्कि आंसर शीट्स के स्कैन, पोर्टल की सिक्योरिटी, टेंडर प्रक्रिया और साइबर सेफ्टी को लेकर उठे सवालों ने शिक्षा मंत्रालय तक को इस पूरे मामले की कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया। अब इस मामले में कुछ ऐसे नाम हैं, जो जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में हैं, जबकि कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो पोर्टल की कमजोरियों को उजागर करने के चलते एथिकल हैकर और हीरो बनकर सामने आए। इनमें से ज्यादातर Gen Z थे, जिन्होंने बोर्ड के दावों की पोल खोलकर रख दी। चलिये बात करते हैं सीबीएसई विवाद में सामने आए इन 5 नामों के बारे में...
OSM पोर्टल क्या होता है ?
सबसे पहले तो ये जान लेते हैं कि OSM पोर्टल होता क्या है। दरअसल ओएसएम यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग पोर्टल एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (Digital Evaluation System) है। पहली बार 12वीं की आंसर शीट्स को चेक करने के लिए इसका प्रयोग हुआ था। इसके तहत इंटर की आंसर शीट्स को स्कैन करके डिजिटली शिक्षकों के पास भेजा जाता है और फिर इनकी जांच कंप्यूटर स्क्रीन पर होती है।
जब ओएसएम में निकली खामियां
ऐसा माना जा रहा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा सटीक होती है और गलतियां होने के चांसेज काफी कम हो जाते हैं। वहीं इससे भौतिक रूप से कॉपियों के बंडल भी एक केंद्र से दूसरे केंद्र तक लेकर जाने का समय बचता है और रिजल्ट भी जल्दी तैयार होता है। हालांकि रिजल्ट जारी होने के बाद इस पोर्टल में कई खामियां निकलीं, जिसके बाद विवाद बस गहराता ही चला गया।
पोर्टल की पोल खोलने वाले निसर्ग अधिकारी
CBSE OSM विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हुई वो निसर्ग अधिकारी का है। इस 12वीं क्लास के स्टूडेंट ने दावा किया था कि उसने OSM पोर्टल में कई गंभीर सुरक्षा खामियां खोजीं। उनके मुताबिक 19 साल के निसर्ग ने सीबीएसई के ऑनस्क्रीन मार्किंग में डिजिटल मूल्यांकन में बड़ी सुरक्षा खामियों का पर्दाफाश किया और ये साबित कर दिया कि वे एक परीक्षाक के रूप में सिस्टम में लॉगिन करके किसी भी स्टूडेंट के नंबर बदल सकते थे। निसर्ग ने इसके बाद सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों को कार्रवाई करनी पड़ी। निसर्ग ने एथिकल हैकर बनकर सीबीएसई के ओसएम पोर्टल की पोल खोलकर रख दी।
सार्थक सिद्धांत ने किया एक्सपोज
सार्थक सिद्धांत की बात करें तो वेदांत के OSM पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने इसकी खामियों को उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। झारखंड के रांची के रहने वाले सार्थक को अपनी आंसरशीट काफी धुंधली और आधी अधूरी मिली। फिर अपने रिजल्ट से असंतुष्ट होकर उन्होंने सिस्टम को एक्सपोज करना शुरू कर दिया। उन्होंने इस नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और फिर सिस्टम की खामियों को अपने ब्लॉग पर शेयर करना शुरू कर दिया। हाल ही में सीबीएसई के चेयरमैन के तबादले के बाद राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात की।
पाकिस्तानी कहकर वेदांत श्रीवास्तव को किया ट्रोल
वेदांत श्रीवास्तव की बात करें तो वे हाल ही में सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं में मार्किंग में गड़बड़ी के खिलाफ व्हिसलब्लोअर बनकर उभरे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये सीबीएसई की खामियों पर आवाज उठाई, जिसके बाद देखते ही देखते वे भी सुर्खियों में आ गए। वेदांत ने इंटर की परीक्षा दी थी लेकिन फिर उनके फिजिक्स में बहुत कम नंबर आए, जबकि अन्य सब्जेक्ट्स में उनके 91 मार्क्स थे। उन्होंने इस धांधली को उजागर किया, जिसके बाद उन्हें पाकिस्तानी कहकर ट्रोल तक किया गया।
मोक्ष यादव ने दिखाई बड़ी गड़बड़
दिल्ली के रहने वाले मोक्ष यादव ने 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी में कम नंबर्स आने के बाद अपनी आंसर शीट मंगवाई थी लेकिन जब उन्हें कॉपी मिली तो सबसे बड़ी गड़बड़ी सामने आ गई। छात्र ने दावा किया कि कॉपी का पहला पेज तो उसका था लेकिन बाकी के पेज किसी दूसरे छात्र के थे। मोक्ष और उसके परिवार ने कहा कि बाकी पन्नों की हैंडराइटिंग पूरी तरह से अलग थी।
संजना के मामले में बोर्ड ने मानी गलती
CBSE कक्षा 12वीं की छात्रा संजना का मामला भी खूब सुर्खियों में रहा। जिन्होंने अपने री-इवैल्युएशन के दौरान हुई गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। वेदांत के बाद संजना ही दूसरी छात्रा थीं, जिन्होंने पाया कि जो कॉपी स्कैन हुई थी, उसकी आंसर शीट का सिर्फ पहला ही पेज उनका था। इसके बाद उन्होंने बोर्ड को ईमेल के जरिये शिकायत भेजी, जिसपर बोर्ड ने अपनी गलती मानी।
