सीबीएसई (CBSE) से जुड़े स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि जो विद्यार्थी पहले से 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें बीच सेशन में अपनी भाषा बदलने की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे छात्र 10वीं बोर्ड परीक्षा तक अपने मौजूदा विषय के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
हाल ही में सीबीएसई ने स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तीन-भाषा सूत्र लागू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद कई स्कूलों, छात्रों और अभिभावकों के बीच कंफ्यूजन की स्थिति थी। लोगों को आशंका थी कि जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, उन्हें अचानक उनमें से एक विषय हटाकर किसी भारतीय भाषा को शामिल करना पड़ेगा।
टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ बातचीत के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि पहले जारी किए गए निर्देशों में पर्याप्त स्पष्टता नहीं थी, जिसकी वजह से भ्रम फैला। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और किसी भी छात्र को अचानक विषय बदलने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
इसमें नहीं किया जाएगा कोई बदलाव
धर्मेंद्र प्रधान के अनुसार, वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले छात्र अपने चुने हुए भाषा संयोजन के साथ ही 10वीं बोर्ड परीक्षा तक पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। यानी जिन छात्रों ने दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है, उन्हें फिलहाल कोई बदलाव नहीं करना होगा।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगा नियम
हालांकि, शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधान नए छात्रों पर चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि जो विद्यार्थी भविष्य में 6वीं कक्षा में प्रवेश लेंगे, उन्हें तीन-भाषा नीति के अनुसार पढ़ाई करनी होगी। इस व्यवस्था में तीन भाषाएं होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल रहेंगी। फिलहाल सीबीएसई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक संशोधित अधिसूचना जारी नहीं की गई है। माना जा रहा है कि बोर्ड अपनी गवर्निंग काउंसिल की बैठक के बाद नया आदेश जारी करेगा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि नई नीति पुराने और नए छात्रों पर किस प्रकार लागू होगी।
