एजुकेशन

Current Affairs: भिखारी ठाकुर कौन हैं, जिनके लिए उठ रही भारत रत्न की मांग, कहा जाता है 'भोजपुरी का शेक्सपियर'

Current Affairs Today: करेंट अफेयर्स श्रृंखला की इस कड़ी में आज आप जानेंगे भिखारी ठाकुर के बारे में, जानें कौन हैं ये? आखिर क्यों इनके लिए भारत रत्न की मांग उठ रही है, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को इस बारे में जरूर पता होना चाहिए।

Image

भिखारी ठाकुर कौन हैं (image - canva)

Current Affairs Today: भोजपुरी के प्रसिद्ध कवि और लोकनाट्य परंपरा के संस्थापक भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर बिहार के लोग उन्हें याद कर रहे हैं। उन्हें 'भोजपुरी का शेक्सपियर' कहा जाता है। इस मौके पर उन्हें भारत रत्न देने की मांग तेज हो रही है। अगर आप प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों में से एक हैं, तो आपको इनके बारे कुछ बेसिक बातें जरूर पता होनी चाहिए।

सारण से सांसद राजीव प्रताप रूडी ने भिखारी ठाकुर को मरणोपरांत पद्म भूषण देने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। वे बिहार के सभी सांसदों के हस्ताक्षर लेकर एक संयुक्त प्रस्ताव भारत सरकार को सौंपेंगे।

भोजपुरी लोकनाट्य के संस्थापक हैं भिखारी ठाकुर

सारण विकास मंच के संयोजक शैलेंद्र प्रताप सिंह ने भी भारत सरकार से मांग की है कि भोजपुरी लोकनाट्य के संस्थापक और महान समाज सुधारक भिखारी ठाकुर को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। बता दें, भिखारी ठाकुर का जन्म 18 दिसंबर साल 1887 को बिहार के छपरा गांव के कुतुबपुर में एक हज्जाम परिवार में हुआ था।

बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे ठाकुर

भिखारी ठाकुर बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। वे लोक कलाकार के साथ कवि, गीतकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, लोक संगीतकार और अभिनेता भी थे। उनकी मातृभाषा भोजपुरी थी और उन्होंने इसी भाषा को अपने काव्य और नाटक की भाषा बनाया।

भिखारी ठाकुर के लिए पद्म भूषण की मांग

उन्होंने कहा कि सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने भिखारी ठाकुर के लिए पद्म भूषण की मांग की है, जिसका कोई विरोध नहीं है। लेकिन, उनका मानना है कि रूडी ने भिखारी ठाकुर के महत्व को कम आंका है। भिखारी ठाकुर ने भोजपुरी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपने नाटकों और गीतों के जरिए सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय चेतना फैलाई। उन्होंने शोषण, बाल विवाह, नारी उत्पीड़न, शराबखोरी और प्रवासी दुख जैसे मुद्दों को लोगों तक पहुंचाया, जो स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ एक सामाजिक क्रांति थी।

भिखारी ठाकुर की रचना

उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर की रचना 'बिदेसिया' केवल एक नाटक नहीं, बल्कि प्रवासी मजदूरों की पीड़ा की कहानी है, जो आज भी प्रासंगिक है। उनकी रचना 'बेटी-बेचवा' बाल विवाह पर तीखा व्यंग्य करती है, जबकि 'गबरघिचोर' महिलाओं की स्वतंत्रता और सम्मान की बात करती है। वे सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि जन-गायक, लोक-मसीहा और सांस्कृतिक योद्धा थे। भोजपुरी समाज के लिए वे आस्था, सम्मान और पहचान का प्रतीक हैं। इसलिए, उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना चाहिए।

वहीं, प्रदेश भाजपा के मीडिया पैनलिस्ट पंकज सिंह कहते हैं कि भिखारी ठाकुर को भारत रत्न देने की मांग पुरानी है। उनका जीवन सादगी, संघर्ष, सामाजिक बदलाव और सांस्कृतिक जागरण का प्रतीक है। जिस तरह भूपेन हजारिका को भारत रत्न मिला, उसी तरह भिखारी ठाकुर को भी यह सर्वोच्च सम्मान देना चाहिए।

IANS इनपुट के साथ

Neelaksh Singh
नीलाक्ष सिंहauthor

नीलाक्ष सिंह 2021 से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल से जुड़े हैं और एजुकेशन सेक्शन के लिए कंटेंट लिखते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रिंट मीडिया में इंटर्नशिप की, जहां फील्ड रिपोर्टिंग, स्टूडेंट-इश्यू बेस्ड ग्राउंड स्टोरीज और सटीक न्यूजराइटिंग की बुनियादी समझ हासिल की। प्रिंट के बाद डिजिटल मीडिया में भी वह एजुकेशन बीट पर ही लगातार काम करते रहे हैं। पत्रकारिता में 10 सालों से सक्रिय नीलाक्ष सिंह 12 हजार से अधिक खबरें लिख चुके हैं। वह एग्जाम अपडेट्स, एडमिशन प्रोसेस, करियर गाइडेंस, स्टूडेंट वेलफेयर, बोर्ड रिजल्ट्स और नीतिगत बदलावों पर गहन और बेहद उपयोगी कंटेंट तैयार करते हैं।

और पढ़ें
End of Article