Mehul Purohit Success story: राजस्थान के बीकानेर में जन्मे मेहुल पुरोहित की कहानी सिर्फ आज की कामयाबी की नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, त्याग और अटूट हौसले की मिसाल है। 8 फरवरी 2001 को बीकानेर में जन्में मेहुल की जिंदगी आसान नहीं रही। जब वह छोटे थे, तभी उनके पिता, कृती पुरोहित का साया उनके सिर से उठ गया। ऐसे मुश्किल वक्त में उनकी मां मधु पुरोहित ने घर चलाने और बच्चों का भविष्य बनाने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम किए, दिन-रात एक कर दी। मां की मेहनत और त्याग का कर्ज मेहुल ने सफल होकर चुकाया।
मेहलु ने करियर की अलग राह चुनी और डिजिटल वर्ल्ड को हथियार बनाकर लीक से हटकर मुकाम पाया। बीकानेर से निकलकर डिजिटल ब्रांडिंग और इन्फ्लूएंसर मैनेजमेंट की दुनिया में आज मेहुल पुरोहित ने बड़ा नाम बना लिया है।
मेहुल बताते हैं कि जब भी वे किसी काम में असफल होते थे या हिम्मत हारने लगते थे, उनकी मां एक सच्चे मेंटर की तरह उन्हें समझाती थीं। वे हमेशा उन्हें आगे बढ़ने का हौसला देती थीं। मां का यह त्याग और मार्गदर्शन ही था, जिसने मेहुल को कभी रुकने नहीं दिया।
किताबों से ज्यादा डिजिटल क्लासरूम में सीखा
मेहुल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई रमेश इंग्लिश स्कूल से की और फिर प्लैनेट ऑफ कॉमर्स से हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने 2021-23 के बीच महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर से ग्रेजुएशन किया। लेकिन उनकी असली कामयाबी का सफर 11वीं क्लास में ही शुरू हो गया था, जब उन्होंने ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी। और यहीं पर काम आए उनके 'असली क्लासरूम' – Google और YouTube!
ट्यूशन की महंगी फीस देने की बजाय, मेहुल ने इन प्लेटफॉर्म्स पर घंटों बिताए। ग्राफिक डिजाइनिंग के ट्यूटोरियल देखे, नई-नई चीजें सीखीं, और खुद से प्रयोग किए। यहीं से उन्होंने फ्रीलांसिंग से अपने करियर की शुरुआत की। जो ज्ञान और कौशल वो बड़े-बड़े संस्थानों में लाखों खर्च करके सीखते, वो उन्होंने अपनी लगन और इंटरनेट की मदद से हासिल कर लिया।
2021 में रखी 'मल्टीफेज डिजिटल' की नींव
साल 2021 में, मेहुल ने अपनी मेहनत, रचनात्मकता और डिजिटल दुनिया की गहरी समझ के दम पर अपनी खुद की कंपनी मल्टीफेज डिजिटल की स्थापना की। यह कंपनी आज डिजिटल ब्रांडिंग, इन्फ्लूएंसर मैनेजमेंट और बड़े-बड़े ब्रांड कैंपेन चलाती है। मेहुल की मेहनत और उनके काम की गुणवत्ता ने उन्हें बॉलीवुड सेलेब्रिटीज से लेकर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड्स के साथ काम कर रही है।
सीखने से मिलती है सफलता
आज जब हर कोई डिग्री के पीछे भाग रहा है, मेहुल पुरोहित जैसे युवा ये साबित कर रहे हैं कि असली ज्ञान किताबों में नहीं, बल्कि सीखने की इच्छा और उसे अमल में लाने की हिम्मत में है। उनकी कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं। मेहुल ने दिखा दिया कि अगर आप चाहें, तो Google और YouTube भी आपके 'असली क्लासरूम' बन सकते हैं, और आपको कामयाबी की बुलंदियों तक पहुंचा सकते हैं।
