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Bhagat Singh Jayanti: शहीद भगत सिंह पर लिखें ये आसान निबंध, मन में जगाएंगे देशभक्ति की भावना

Bhagat Singh Jayanti essay: आज यानी 28 सितंबर के दिन शहीद क्रांतिकारी भगत सिंह की जयंती मनाई जाती है। भगत सिंह की जयंती के मौके पर कुछ आसान निबंध यहां दिये गए हैं, जो आपके अंदर देशभक्ति की भावना जगा देंगे। ये निबंध पढ़ने और याद करने में बेहद आसान हैं।

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Bhagat Singh Jayanti (Twitter)

Bhagat Singh Jayanti par Nibandh: 28 सितंबर का दिन इतिहास के पन्नों पर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। आज ही के दिन साल 1907 को पंजाब के बागा में एक बच्चे का जन्म हुआ था, जिसने आगे चलकर भारत की आजादी की लड़ाई को एक नई दिशा दी। ये बच्चा था शहीद ए आजम भगत सिंह, जिनका नाम लेते ही हर भारतीय के मन में जोश और गर्व की लहर दौड़ पड़ती है। भगत सिंह की जयंती पर अकसर स्कूल में बच्चों को निबंध लिखने को कहा जाता है ऐसे में आज हम आपको ऐसे आसान और याद रखने के लिए आसान निबंध बताएंगे, जिन्हें पढ़कर न आप स्कूल में अच्छे नंबर ला सकते हैं, बल्कि आपके मन में भी देशभक्ति और साहस की एक भावना जगेगी।

1- शहीद भगत सिंह- हमारा नायक

भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के बंगा गांव में हुआ। छोटी सी उम्र से ही उनके अंदर देशभक्ति का भाव था। देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए उन्होंने बेहद संघर्ष किया। जेल में रहते हुए उन्होंने भूख हड़ताल की और 23 मार्च 1931 को उन्हें फांसी दे दी गई। भगत सिंह का जीवन हमें साहस और देशभक्ति सिखाता है।

2- भगत सिंह की शहादत

भगत सिंह ने बेहद कम उम्र में ही देशभक्ति और क्रांति का काम शुरू किया। वो अपने दोस्तों के साथ लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लेने और अंग्रेजों को चेतावनी देने के लिए साहसिक कदम उठाते थे। जेल में रहते हुए उन्होंने अपने विचारों और लेख से युवाओं को जागरूक करना शुरू किया। भगत सिंह की शहादत हमें सिखाती है कि देश के लिए कुछ करना बहुत बड़ा और सम्मानजनक कार्य है।

3- भगत सिंह का इंकलाब जिंदाबाद संदेश

भगत सिंह का एक नारा था- इंकलाब जिंदाबाद। इसका मतलब था कि क्रांति और बदलाव हमेशा जिंदगी का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने देश के लिए अपने जीवन का आहुति दी और आजादी की लड़ाई को हमेशा आगे बढ़ाया। हमें उनकी कहानी से सीखना चाहिए कि साहस और सही सोच किसी भी मुश्किल रास्ते को आसान बना सकती है।

4- देशभक्ति का जुनून

भगत सिंह ने छोटी सी उम्र में ही अंग्रेजों की अन्यायपूर्ण हरकतों को देखा और इसका उनके मन में बेहद गहरा असर हुआ। उन्होंने नेशनल कॉलेज लाहौर से पढ़ाई की और पढ़ाई के साथ ही देश की आजादी के लिए कुछ क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा भी लिया। साल 1928 में लाला लाजपतराय की हत्या के बाद उन्होंने इसका बदला लेने के लिए कुछ साहसिक कदम उठाए। जेल में रहते हुए भी उन्होंने भूख हड़ताल की और देश के युवाओं को जागरूक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 23 मार्च साल 1931 को सिर्फ 23 साल की उम्र में ही उन्हें फांसी दे दी गई मगर उनकी शहादत ने बच्चे बच्चे को प्रेरित किया।

जब कांप उठी ब्रिटिश हुकूमत

नेशनल स्कूल लाहौर से शिक्षा लेने के साथ साथ ही भगत सिंह ने क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया। भगत सिंह ने अंग्रेजी संसद में बम फेंकने की योजना बागपत में रहकर बनाई थी। सिसाना गांव में क्रांतिकारी विमल प्रसाद जैन के यहां 3 अप्रैल 1929 को भगत सिंह, पटुकेश्वरदत्त,भगवती चरण वोहरा, दुर्गा भाभी ने एसेंबली में बम फेंकने की पूरी तैयारी कर ली थी। वे बम ले आए थे, जिसे अलमारी में छिपाकर रखा गया। इसके बाद उन्होंने साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर केंद्रीय विधानसभा में बम फेंक दिया। ये प्लानिंग ब्रिटिश हुकूमत को चेतावनी देने के लिए की गई थी। इसका मकसद किसी की जान लेना नहीं था।

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