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NEET और CBSE के बाद अब JEE Advanced पर विवाद? लाखों छात्रों के डेटा लीक ने खड़े किए सवाल!

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET यूजी के बाद अब देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE एडवांस्ड भी विवादों में आ गई है। इस परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्रों के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

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JEE Advanced Data leak Controversy: जेईई एडवांस्ड डेटा लीक

JEE Advanced Data leak Controversy: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET यूजी के बाद अब देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE एडवांस्ड भी विवादों में आ गई है। इस परीक्षा में शामिल हुए लाखों छात्रों के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। NEET पेपर लीक और सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग यानी OSM पोर्टल को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब जेईई एडवांस्ड 2026 के करीब 1.80 लाख अभ्यर्थियों का डेटा कथित रूप से इंटरनेट पर लीक होने का नया मामला सामने आया है। इस खुलासे ने देश की परीक्षा प्रणाली और डिजिटल सुरक्षा व्यवस्थाओं पर कई नये और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि इस बार जेईई एडवांस्ड का आयोजन आईआईटी रुड़की ने किया था। परीक्षा के लिए कुल 1,87,389 छात्रों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 1,79,694 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। एक जून को इस परीक्षा का रिजल्ट जारी किया गया था।

मामले की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट से हुई। Anil Rylen नाम के एक यूजर ने दावा किया कि जेईई एडवांस्ड 2026 की परिणाम प्रणाली से जुड़ा एक क्लाउड स्टोरेज गलत तरीके से कॉन्फिगर किया गया था। इसके चलते बिना किसी पासवर्ड या प्रमाणीकरण के हजारों दस्तावेज और उम्मीदवारों का डेटा सार्वजनिक रूप से एक्सेस किया जा सकता था। इस यूजर ने बाकायदा सबूत दिखाते हुए पोस्ट लिखा। जिसके बाद आईआईटी रुड़की हरकत में आया। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा एजेंसियों के पास करोड़ों छात्रों का व्यक्तिगत डेटा मौजूद होता है। इसमें आधार से जुड़ी जानकारियां, मोबाइल नंबर, ईमेल, पता, शैक्षणिक रिकॉर्ड और कई संवेदनशील दस्तावेज शामिल होते हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि छात्रों के अधिकार और गोपनीयता से जुड़ा मुद्दा भी है।

आईआईटी रुड़की की ओर से खामी स्वीकार कर लेना पारदर्शिता की दृष्टि से सकारात्मक कदम माना जा सकता है, लेकिन इससे संस्थान की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी तकनीकी गलती आखिर हुई कैसे? क्या डेटा सुरक्षा ऑडिट नियमित रूप से किया जा रहा था? क्या क्लाउड सर्वर की निगरानी पर्याप्त थी? और सबसे महत्वपूर्ण बात, यदि एक सोशल मीडिया यूजर इस खामी को खोज सकता है तो क्या यह संभव नहीं कि किसी साइबर अपराधी ने भी इस डेटा तक पहुंच बनाई हो?

दावे के अनुसार, इस डेटा में उम्मीदवारों के नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, एडमिट कार्ड और परिणाम से जुड़ी जानकारी शामिल थी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए स्क्रीनशॉट में कई छात्रों के दस्तावेज, उनके सब्जेक्ट वाइज नंबर, रैंक और पर्सनल जानकारियां तक दिखाई गईं। यदि यह दावा पूरी तरह सही साबित होता है तो यह केवल तकनीकी चूक नहीं, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक की डेटा सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाएगी।

सबसे गंभीर बात यह है कि इस मामले में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी रुड़की ने खुद तकनीकी खामी की पुष्टि की है और इस कमी को तत्काल सुधारने का दावा किया है। संस्थान ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए माना कि क्लाउड स्टोरेज में कॉन्फिगरेशन संबंधी समस्या थी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जा रहा है। हालांकि संस्थान ने यह भी कहा कि डेटा केवल "रीड ओनली" मोड में था और उसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं था।

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल डेटा में बदलाव न हो पाना ही पर्याप्त सुरक्षा है? अगर किसी छात्र का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, परीक्षा रिकॉर्ड और एडमिट कार्ड जैसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो जाए तो यह अपने आप में गंभीर सुरक्षा खतरा है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही सीबीएसई के OSM पोर्टल को लेकर भी डेटा सुरक्षा और परीक्षा प्रबंधन पर सवाल उठे थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर कर रही हैं। साइबर विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि व्यक्तिगत जानकारी का दुरुपयोग फर्जी कॉल, पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के लिए किया जा सकता है। यह मामला देश के सबसे प्रतिभाशाली और प्रतिस्पर्धी छात्रों से जुड़ा है। जब देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं का संचालन करने वाली संस्थाओं के डिजिटल प्लेटफॉर्म ही सुरक्षित नहीं हैं, तो छात्रों के मन में अपने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। डेटा सुरक्षा में हुई किसी भी चूक को सामान्य तकनीकी गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

छात्रों के भविष्य पर संकट?

इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। लेकिन इतना तय है कि यह मामला केवल एक तकनीकी कमी भर नहीं है। यह उन लाखों छात्रों की सुरक्षा और विश्वास का प्रश्न है जिन्होंने अपने सपनों के साथ इस परीक्षा में भाग लिया। परीक्षा में असफल होना एक छात्र के लिए दुखद हो सकता है, लेकिन उसकी निजी जानकारी का लीक होना उसके पूरे भविष्य को जोखिम में डाल सकता है। अब जरूरत इस बात की है कि मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, प्रभावित छात्रों को पूरी जानकारी दी जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएं। क्योंकि देश की प्रतिष्ठित परीक्षा संस्थाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब केवल निष्पक्ष परीक्षा कराना नहीं, बल्कि छात्रों के डेटा और भरोसे दोनों की सुरक्षा करना भी है।

Kuldeep Raghav
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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