सूरत : सरकारी मेडिकल कॉलेज, सूरत में प्रथम वर्ष के रेजिडेंट डॉक्टर स्वर्गीय डॉ. हर्ष पंड्या के कथित रैगिंग मामले में गुजरात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के निर्देश पर माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. सुमैया मुल्ला को तत्काल प्रभाव से 90 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, रैगिंग की गंभीर घटना को रोकने और अपने अनुशासनात्मक दायित्वों के निर्वहन में कथित गंभीर लापरवाही के चलते यह कार्रवाई की गई है।
रैगिंग रोकने में लापरवाही का आरोप
डॉ. सुमैया मुल्ला माइक्रोबायोलॉजी विभाग में क्लास-1 की प्रोफेसर हैं। विभाग के अनुसार, डॉ. हर्ष पंड्या से जुड़े गंभीर रैगिंग मामले को रोकने में लापरवाही सामने आने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से 90 दिनों के लिए निलंबित किया गया है। यह कार्रवाई डॉ. हर्ष पंड्या की आत्महत्या के मामले के बाद की गई है। स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की है।
रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने कहा कि गुजरात की किसी भी मेडिकल या शैक्षणिक संस्था में रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की रैगिंग के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है और छात्र सुरक्षा से समझौता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि अधिकारी चाहे कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, अगर छात्र सुरक्षा में लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सस्पेंशन के दौरान वडोदरा रहेगा मुख्यालय
सस्पेंशन की 90 दिनों की अवधि के दौरान डॉ. सुमैया मुल्ला का मुख्यालय सरकारी मेडिकल कॉलेज, वडोदरा रहेगा। सक्षम नियंत्रक अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना वह वडोदरा मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगी। इसके अलावा, सस्पेंशन अवधि के दौरान उन्हें किसी भी प्रकार की निजी नौकरी, व्यवसाय या अन्य पेशेवर गतिविधि करने की अनुमति नहीं होगी। इन शर्तों का उल्लंघन करने पर उनका निर्वाह भत्ता रोका जा सकता है और उनके खिलाफ अतिरिक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एंटी-रैगिंग व्यवस्था होगी मजबूत
घटना के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने गुजरात की सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों को एंटी-रैगिंग कमेटी और एंटी-रैगिंग स्क्वॉड को तत्काल अधिक सक्रिय और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। सभी मेडिकल कॉलेजों को अपने परिसरों में छात्रों के लिए सुरक्षित, अनुशासित और भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि छात्रों की सुरक्षा में लापरवाही या रैगिंग की घटनाओं को रोकने में विफल रहने वालों के खिलाफ जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
