दिल्ली के अस्पताल अब नहीं कर पाएंगे बेड्स की कालाबाजारी, उप राज्यपाल अनिल बैजल ने दिए कड़े निर्देश

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 10, 2020, 05:52 PM IST

DDMA on Delhi hospital beds: दिल्ली में प्राइवेट अस्पताल बेड्स की कालाबाजारी न कर सकें इसके लिए कुछ अहम निर्देश दिए हैं।

दिल्ली के अस्पताल अब नहीं कर पाएंगे बेड्स की कालाबाजारी, उप राज्यपाल अनिल बैजल ने दिए कड़े निर्देश

नई दिल्ली। दिल्ली में कोरोना के मामले 31 हजार के पार हैं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल आगे की तस्वीर रख चुके हैं कि कैसी दिल्ली हम सबके सामने होगी। इन सबके बीच डीडीएमए ने प्राइवेट अस्पतालों द्वारा बेड्स की कालाबाजारी रोकने के लिए कड़ा फैसला किया है। हाल ही में इस तरह की खबर आई थी कि दिल्ली के कुछ अस्पताल बेड्स की कालाबाजारी कर रहे थे। इस सिलसिले में सीएम अरविंद केजरीवाल ने चेतावनी भी दे थी। 

डीडीएमए का निर्देश
डीडीएमए ने इस संबंध में जो आदेश दिया है उसे जानना जरूरी है। उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में किसी को भी बेजा फायदा उठाने की इजाजत नहीं दी जाएगा। कोरोना से निपटने के लिए हम सबको एक साथ मिलजुल कर दूसरे विकल्पों की भी तरफ आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि हमें आगे के हालात को देखते हुए मेकशिफ्ट व्यवस्था पर भी काम करना होगा। 


  1. कोविड 19 को देखते हुए दिल्ली के सभी अस्पतालों, क्लिनिक्स, नर्सिंग होम बेड्स को लेकर पारदर्शी रहें इस संबंध में अब यह फैसला किया गया है कि अस्पतालों को एंट्री गेट पर ही डिस्पले बोर्ड पर बड़े बड़े अक्षरों में बताना बोगा कि कोविड 19 और नॉन कोविड मरीजों के लिए कितने बेड्स उपलब्ध हैं। इसके साथ ही कमरों या बेड्स के चार्ज क्या हैं। 
  2. यही नहीं स्वास्थ्य विभाग को सलाह दी गई है कि डिस्प्ले बोर्ड्स पर जो जानकारी दी जाएगी उसे सरकारी ऐप या पोर्टल पर भी डालना होगा। 
  3. दिल्ली आपादा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी औचक निरीक्षण भी करेंगे ताकि सही डेटा ही डिस्प्ले बोर्ड पर दिखाया जा सके और अस्पताल तय कीमत से ज्यादा धनराशि न वसूल सकें। इस संबंध में की गई कार्रवाई को भी जल्द से जल्द डीडीएमए को भेजा जा सकता है।

सीएम अरविंद केजरीवाल की अपील
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उपराज्यपाल ने जो कुछ कहा है कि उसका वो सम्मान करने के साथ साथ पालन भी करेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह के कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं उसमें यह संख्या जून के अंत तक एक लाख के पार हो जाएगी। यह समय राजनीति का नहीं है, कंधे से कंधा मिलाकर हम सबको आगे बढ़ना होगा। अगर ऐसा हम नहीं करेंगे तो मुसीबतों में और इजाफा ही होगा। 

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