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Rajasthan: नाबालिग लड़की की खरीद-फरोख्त का भंडाफोड़, बुआ ने बेचा; तीन साल में दो बच्चों की बनी मां

Rajasthan Crime: राजस्थान की राजधानी से दिल दहला देने वाली वारदात का खुलासा हुआ है, जहां नाबालिग लड़की की खरीद-फरोख्त के मामले में आरोपी बाप-बेटे सहित तीन की गिरफ्तारी हुई है। लड़की जब 11 साल की थी, तो उसकी बुआ ने उसे दो लाख रुपये में बेच दिया था। तीन साल में अब वो दो बच्चों की मां बन चुकी है।

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नाबालिग के साथ खरीद-फरोख्त का खेल।

Photo : iStock

Crime News: राजस्थान पुलिस ने एक नाबालिग लड़की की खरीद-फरोख्त के मामले में बाप-बेटे समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। उसके अनुसार, तीन साल पहले नाबालिग जब 11 साल की थी तो उसकी बुआ ने उसे दो लाख रुपये में बेच दिया था। वह 14 साल की उम्र में दो बच्चों की मां बन चुकी है।

लड़की को खरीदने वालों को पुलिस ने दबोचा

मुरलीपुरा के थानाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि लड़की को खरीदने के आरोपी संदीप यादव और सतवीर यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है और ये दोनों हरियाणा के चरखी दादरी जिले के बधवाना गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पीड़िता किसी तरह भागने में सफल रही और 16 जुलाई को उसने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

बुआ ने अपनी भतीजी को दो लाख रुपये में बेचा

पुलिस के अनुसार आरोपी ने गलत जानकारी देकर नाबालिग लड़की का आधार कार्ड बनवा लिया। पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने संदीप को अंबाला में एक सीमेंट फैक्टरी से और उसके पिता सतवीर को चरखी दादरी के बधवाना गांव से गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक लड़की के माता-पिता यहां मुरलीपुरा इलाके में रहते थे लेकिन उनके बीच लड़ाई होने पर वह नीमराणा में अपनी बुआ के पास चली गई। बुआ ने उसकी देखभाल करने के बजाय उसे हरियाणा के एक परिवार को दो लाख रुपये में बेच दिया। पीड़िता 12 और 14 साल की उम्र में दो बच्चों की मां बन गई।

पॉक्सो कानून के तहत दर्ज किया गया मामला

पुलिस के अनुसार पीड़िता की शिकायत के आधार पर भादंसं की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उपायुक्त अमित कुमार ने कहा, "पीड़िता को हरियाणा में बेचने वाली उसकी बुआ को बहरोड़ शहर से हिरासत में लिया गया और उसे भी आज गिरफ्तार कर लिया गया। उससे पूछताछ की जा रही है।"

उन्होंने कहा कि मामला भादंसं की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है क्योंकि अपराध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के कार्यान्वयन से पहले हुआ और मामले की जांच अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंप दी गई है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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