क्राइम

तो 'बलि' थी राजा की हत्या! मर्डर केस में सामने आया तांत्रिक एंगल, घर के दरवाजे पर क्या थी पोटलीनुमा चीज?

राजा रघुवंशी के पिता अशोक रघुवंशी ने आरोपी सोनम को लेकर गंभीर आरोप लगाए है । उन्होंने संदेह जताया है कि सोनम तंत्र मंत्र पर भरोसा करती है और उसका इस्तेमाल उसने राजा के खिलाफ किया।

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राजा रघुवंशी का शव 2 जून को पुलिस को मिला था।

नई दिल्ली: मेघालय में हनीमून के दौरान जान से मार डाले गए इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी के पिता ने सोमवार को संदेह जताया कि मुख्य आरोपी सोनम तंत्र-मंत्र पर विश्वास करती है और उसने उनके बेटे पर इसका इस्तेमाल किया था।

राजा रघुवंशी (29) की साजिशन हत्या में शामिल होने के आरोप में उनकी पत्नी सोनम (25), उसके कथित प्रेमी राज कुशवाह (20) और कुशवाह के तीन दोस्तों को गिरफ्तार किया गया है। राजा रघुवंशी, मेघालय में हनीमून के दौरान 23 मई को लापता हो गए थे और उनका शव पूर्वोत्तर के इस राज्य में दो जून को मिला था।

राजा के पिता अशोक रघुवंशी का आरोप

इंदौर में राजा रघुवंशी के घर उनकी तेरहवीं की रस्म के बाद उनके पिता अशोक रघुवंशी ने संवाददाताओं से कहा कि सोनम के कहने पर राजा ने एक पोटलीनुमा चीज हमारे घर के मुख्य द्वार पर टांग दी थी। सोनम ने राजा से कहा था कि इसे टांगने से घर में रहने वाले लोगों को बुरी नजर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि राजा की हत्या के बाद उन्हें लगता है कि सोनम तंत्र-मंत्र पर विश्वास करती है और उसने उनके बेटे पर इसका इस्तेमाल किया था। अशोक रघुवंशी ने बताया कि राजा की हत्या के बाद उनके घर से यह पोटलीनुमा चीज हटा दी गई। उन्होंने मांग की कि उनके बेटे की हत्या में दोषी पाए जाने वाले लोगों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

सोनम और राजा दोनों मांगलिक थे

सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी

सोनम रघुवंशी और राजा रघुवंशी

राजा रघुवंशी की मां उमा ने कहा कि उनका बेटा और सोनम, दोनों जन्म कुंडली के लिहाज से मांगलिक थे और पारंपरिक तरीके से दोनों की शादी (अरेंज्ड मैरिज) सोनम के परिवार के ज्योतिषी के निकाले गए मुहूर्त के मुताबिक हुई थी। उन्होंने कहा कि सोनम शादी के बाद केवल चार दिन ससुराल रही थी और रस्म के मुताबिक मायके चली गई थी। हमने उसे हंसी-खुशी के साथ मायके के लिए विदा किया था। अगर वह मुझे कभी मिलेगी, तो मैं उससे एक ही बात पूछूंगी कि उसने मेरे बेटे की हत्या क्यों कराई?

2 जून को मिला था राजा रघुवंशी का शव

राजा रघुवंशी का शव दो जून को पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा क्षेत्र (जिसे चेरापूंजी भी कहा जाता है) में एक झरने के पास गहरी खाई में मिला था।राजा रघुवंशी का परिवार ट्रांसपोर्ट के कारोबार से जुड़ा है। उनकी सोनम से शादी 11 मई को इंदौर में हुई थी और दोनों 20 मई को हनीमून के वास्ते मेघालय के लिए रवाना हुए थे। मेघालय पुलिस का विशेष जांच दल (एसआईटी) राजा रघुवंशी की हत्या के मामले की विस्तार से तहकीकात कर रहा है। (भाषा इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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